पाकिस्तान के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम को ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। नदीम ग्लास्गो में 80 मीटर से कम के बेस्ट प्रयास के साथ 9वें स्थान पर रहे। श्रीलंका के रुमेश थरंगा ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह ने क्रमश: सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए। इस परिणाम को अप्रत्याशित नहीं माना जा रहा है, क्योंकि अरशद ने 2026 में कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए स्विट्जरलैंड में केवल एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।
इसके अलावा उन्होंने अपना अधिकांश समय लाहौर की गर्म जलवायु में बिना किसी विदेशी कोच या प्रशिक्षक की प्रत्यक्ष निगरानी में अभ्यास करते हुए बिताया। साउथ अफ्रीका के कोच टेर्सियस लीबेनबर्ग के मार्गदर्शन में पहले प्रशिक्षण ले चुके अरशद ने इस बार अपने स्थानीय कोच सलमान बट और स्थानीय प्रशिक्षकों के साथ तैयारी की। विडंबना यह रही कि लाहौर और ग्लास्गो की मौसम संबंधी परिस्थितियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थीं। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में 90.12 मीटर के बेस्ट प्रयास के साथ गोल्ड मेडल जीतकर मौजूदा चैंपियन बने अरशद इस बार फाइनल में 80 मीटर का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके।
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नहीं थी पर्याप्त तैयारी
खराब प्रदर्शन के कारण वह टॉप-8 खिलाड़ियों के फाइनल के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर पाए। उनके फैंस के लिए यह बड़ा झटका था, क्योंकि 92.97 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो के साथ ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाले अरशद इस बार 80 मीटर की दूरी भी पार करने के लिए संघर्ष करते नजर आए। अरशद के लंबे समय से कोच रहे सलमान बट ने स्वीकार किया कि कॉमनवेल्थ गेम्स में अरशद अपने बेस्ट पर नहीं थे और उनकी तैयारी भी पर्याप्त नहीं थी।
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पाकिस्तान ने पीछे खींचा हाथ
अरशद को मैदान के बाहर भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी समस्या यह रही कि पिछले साल कोच सलमान को बनाए रखने को लेकर विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने उनसे लगभग दूरी बना ली। अरशद के करीबी एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि पिछले साल के अंत से PAAF और यहां तक कि पाकिस्तान खेल बोर्ड (PSB) ने भी कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के दौरान अरशद को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया। सूत्र के अनुसार PAAF ने उनकी तैयारियों से पूरी तरह किनारा कर लिया और प्रशिक्षण से संबंधित उनकी कुछ मांगों पर भी ध्यान नहीं दिया।
इसी तरह PSB ने भी लाहौर में प्रशिक्षण के लिए विदेशी कोच और प्रशिक्षकों की सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु कोई वित्तीय सहायता जारी नहीं की। पूर्व ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मुक्केबाज हुसैन शाह ने कहा, 'यह ऐसा खिलाड़ी है जिसने अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाई। वह एक गांव और कम आय वाले परिवार से आता है लेकिन उसने गोल्ड मेडलों के जरिए पाकिस्तान को इतनी बड़ी उपलब्धियां दिलाईं। इसके बावजूद वह कॉमनवेल्थ गेम्स की उचित तैयारी नहीं कर सका। यह हमारे खेल ढांचे की दुखद तस्वीर पेश करता है।'
कॉमनवेल्थ गेम्स में पाकिस्तान की पहली महिला मेडलिस्ट मुक्केबाज फातिमा जहरा ने भी कहा कि यदि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अधिक इंटरनेशनल अवसर मिले होते तो वह अपने भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीत सकती थीं। फातिमा ने मुक्केबाजी में ब्रॉन्ज मेडल जीता, जो 36 सदस्यीय दल भेजने वाले पाकिस्तान का मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स में अब तक का एकमात्र मेडल है।