संजय सिंह, पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से मुसहरी थाना क्षेत्र के नरौली बालगृह से एक साथ 10 बच्चे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं। इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए सरकारी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार रात हुई इस घटना के बाद से ही पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ी हुई है।
लापता हुए बच्चों में चार ऐसे बच्चे हैं जो बोल और सुन नहीं सकते मूकबधिर, जिसके कारण उनकी सुरक्षा को लेकर डर और बढ़ गया है। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। SDO पूर्वी तुषार कुमार ने तुरंत बालगृह पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। उन्होंने रजिस्टर, हाजिरी और CCTV फुटेज को खंगाला है और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की जा रही है।
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बच्चों की तलाश में जुटी पुलिस और प्रशासन
प्रशासन हर एंगल से इस मामले की जांच कर रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह केवल सुरक्षा की लापरवाही है या बच्चों को गायब करने के पीछे किसी गिरोह का हाथ है। लापता बच्चों में कालू, गोलू और राहुल जैसे बच्चे शामिल हैं, जो बोल-सुन नहीं सकते। इनके अलावा नेपाल, सीतामढ़ी और समस्तीपुर के रहने वाले बच्चे भी गायब हैं। इनमें से कई बच्चों को हाल ही में बाल कल्याण समिति के जरिए यहां लाया गया था।
पूरे जिले में हाई अलर्ट
घटना के बाद पूरे मुजफ्फरपुर जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस ने बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, होटल और ढाबों पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। लापता बच्चों की फोटो और उनकी जानकारी आसपास के जिलों और नेपाल सीमा से सटे इलाकों में भेज दी गई है ताकि उन्हें जल्द से जल्द ढूंढा जा सके। स्थानीय थानों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों की तलाश में कोई कसर न छोड़ें।
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लापरवाही बरतने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
SDO तुषार कुमार ने साफ कहा है कि बच्चों को सुरक्षित वापस लाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर बालगृह के किसी कर्मचारी या गार्ड की लापरवाही पाई गई, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए बालगृहों की सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी और बच्चों की खोजबीन में जुटी हुई हैं।