भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और ब्राह्मण समाज के बड़े चेहरे माने जाने वाले श्रीकांत शर्मा एक बार फिर मंत्री पद से दूर रह गए। योगी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले उनका नाम मंत्री पद की दौड़ में प्रमुखता से लिया जा रहा था लेकिन अंतिम सूची में उन्हें जगह नहीं मिल सकी। इसके बाद पार्टी और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
जनपद मथुरा की वृंदावन विधानसभा सीट से श्रीकांत शर्मा वर्ष 2017 में पहली बार विधायक चुने गए थे। योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में उन्हें ऊर्जा मंत्री जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंपा गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर कई योजनाओं पर काम किया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोबारा जीत हासिल की लेकिन दूसरी बार बनी योगी सरकार में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।
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इसके बाद लगातार यह चर्चा चलती रही कि पार्टी संगठन में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर संगठन के अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए भी उनका नाम सामने आया लेकिन अब तक उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी नहीं मिल सकी है। BJP में श्रीकांत शर्मा पहले राष्ट्रीय सचिव और पार्टी की मीडिया सेल के प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। संगठन और सरकार दोनों में उनका लंबा अनुभव माना जाता है।
10 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार से पहले फिर से यह चर्चा जोर पकड़ने लगी थी कि श्रीकांत शर्मा की सरकार में वापसी हो सकती है। राजनीतिक जानकार भी उनके नाम को मजबूत दावेदार मान रहे थे। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने इस बार समाजवादी पार्टी छोड़कर BJP में आए मनोज पांडे पर भरोसा जताया और उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई। इसके बाद श्रीकांत शर्मा को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया।
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मंत्रिमंडल विस्तार के बाद BJP कार्यालय और संगठन में फिर यह चर्चा शुरू हो गई कि पार्टी भविष्य में उन्हें संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकती है। माना जा रहा है कि ब्राह्मण समाज में उनकी पकड़ और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए पार्टी उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करना चाहती।
मंत्री क्यों नहीं बन पाए श्रीकांत शर्मा?
सूत्रों की मानें तो वृंदावन विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय लोगों के बीच श्रीकांत शर्मा को लेकर नाराजगी की चर्चाएं भी पार्टी नेतृत्व तक पहुंची थीं। क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। बताया जाता है कि संगठन स्तर पर उनके क्षेत्र में गोपनीय फीडबैक भी लिया गया था। इसी रिपोर्ट को मंत्री न बनाए जाने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
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BJP मुख्यालय में यह चर्चा भी रही कि मंत्रिमंडल विस्तार पूरी तरह जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया गया। आगामी चुनावों को देखते हुए BJP ब्राह्मण, OBC और दलित मतदाताओं को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी पहले से ही प्रदेश में कई ब्राह्मण चेहरों को प्रतिनिधित्व दे चुकी है। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, इसी कारण श्रीकांत शर्मा को इस बार मंत्री पद की दौड़ से बाहर रखा गया।