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श्मशान घाट ले जाने से पहले चल पड़ीं 104 साल की बुजुर्ग की सांसें

महाराष्ट्र की रहने वाली 104 साल गंगाबाई सावरी सखारे को उनके परिजन ने मृत समझ लिया गया था लेकिन अंतिम संस्कार से कुछ घंटे पहले ही उनकी सांसें चलने लगीं।

 Gangabai Savji Sakhare

गंगाबाई शवजी साखरे Photo Credit- Social Media

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महाराष्ट्र के नागपुर जिले के रामटेक कस्बे में एक अजब-गजब मामला सामने आया है। रामटेक में रहने वाली 103 साल की गंगाबाई सावरी सखारे की सांसें 12 जनवरी को रुक गई थीं। इसके बाद परिवार ने उन्हें मृत मानते हुए अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी लेकिन अंतिम संस्कार से ठीक कुछ घंटे पहले गंगाबाई जीवित पाई गईं। इस घटना ने उनके पूरे परिवार और आसपास के लोगों को हैरान कर दिया। अब लोगों का मानना है कि यह गंगाबाई का पुनर्जन्म है।

 

यह घटना सोमवार की बताई जा रही है। परिवार के सदस्यों के अनुसार, गंगाबाई पिछले दो महीनों से बिस्तर पर थीं और बीते कई दिनों से सिर्फ दो चम्मच पानी पीकर ही जीवित थीं। परिवार ने बताया कि 12 जनवरी की शाम करीब 5 बजे उनकी सांसें थम गई थीं।

 

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टेंट लगा, गाड़ी बुक हुई और फिर...

परिवार का कहना है कि 12 जनवरी की शाम करीब 5 बजे गंगाबाई की सांसें रुक गईं, जिसके बाद उन्हें मृत मान लिया गया। इसके बाद अंतिम संस्कार की सभी तैयारियाँ शुरू कर दी गईं। घर के बाहर टेंट लगाया गया, लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई और अंतिम संस्कार का समान भी खरीद लिया गया। श्मशान घाट ले जाने के लिए गाड़ी भी बुक कर ली गई थी।

 

शाम करीब 7 बजे, जब गंगाबाई के शव को श्मशान घाट ले जाने की तैयारी हो रही थी, तभी उनके पैरों की उंगलियां हिलने लगीं। उनके पोते राकेश सखारे ने बताया कि उन्होंने दादी के पैर हिलते देखे और तुरंत मदद के लिए चिल्लाया। इसके बाद जब दादी की नाक से रुई हटाई गई तो उन्होंने जोर से सांस लेना शुरू कर दिया।

लोग मान रहे पुनर्जन्म

इस पूरी घटना को पुनर्जन्म से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि 13 जनवरी को ही गंगाबाई का जन्मदिन है। जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले मृत घोषित किए जाने के बाद फिर जीवित हो जाने से लोगों का मानना है कि यह उनका पुनर्जन्म है। पोते राकेश सखारे का कहना है, 'इस घटना ने उनकी दादी को नया जीवन दिया है।'

 

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गंगाबाई के मृत्यु के बाद जीवित पाए जाने की घटना कोई पहली घटना नहीं है। देश और दुनिया में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोग अंतिम संस्कार से ठीक पहले जीवित पाए गए हैं। विज्ञान के अनुसार, किसी व्यक्ति को डॉक्टर की ओर से पूरी तरह जांचने के बाद ही मृत घोषित किया जाता है। कई बार सांस और नाड़ी बहुत धीमी हो जाती है, जिससे व्यक्ति मृत लगता है जबकि वास्तव में वह जीवित होता है। विज्ञान यह मानता है कि मृत्यु के बाद इंसान दोबारा जिंदा नहीं हो सकता है।


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