उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गोंडा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सरकारी अस्पतालों की हकीकत उजागर कर दी है। वीडियो में अस्पताल के ऑर्थोपेडिक वार्ड के अंदर कई चूहे खुलेआम घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि उसी वार्ड में मरीज इलाज के लिए भर्ती हैं। यह दृश्य न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और साफ-सफाई व्यवस्था पर गंभीर चिंता भी पैदा करता है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक मरीज बेड पर सो रहा है और उसके पास रखी दवाइयों और खाने के सामान के आसपास चूहे घूम रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होते ही विपक्षी दलों ने सरकार और अस्पताल प्रशासन पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि निगरानी और जवाबदेही की कमी के चलते प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल होती जा रही है।
इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरा है और तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सिर्फ इमारतें बनाना और उद्घाटन करना काफी नहीं है, जब तक अस्पतालों में साफ-सफाई, सुरक्षा और मरीजों के सम्मान का ध्यान न रखा जाए।
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समाजवादी पार्टी ने उठाए राज्य सरकार पर सवाल
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता नासिर सलीम ने कहा कि इस तरह की घटनाएं साफ तौर पर जांच और तुरंत सुधार की मांग करती हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में नियमित निरीक्षण, पर्याप्त स्टाफ, साफ-सफाई के सख्त नियम और आधुनिक संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था जरूरी है। इसके लिए स्वतंत्र जांच, सफाई कर्मचारियों के लिए बेहतर बजट, मजबूत निगरानी प्रणाली और सख्त व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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नासिर सलीम ने आगे कहा कि प्रदेश के लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए और इसे सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
कांग्रेस पार्टी के आरोप
कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर नियामक निगरानी की कमी का आरोप लगाया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शहनवाज आलम ने कहा कि गोंडा मेडिकल कॉलेज का यह दृश्य न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि डराने वाला भी है। उन्होंने कहा कि केवल उद्घाटन, फीता काटने और फोटो खिंचवाने से व्यवस्थाएं नहीं सुधरतीं। जब साफ-सफाई, सुरक्षा और सम्मान नहीं होता, तो मेडिकल कॉलेज की इमारतें सिर्फ कंक्रीट का ढांचा बनकर रह जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था न होने की वजह से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमराई हुई हैं।