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कोटा में सिजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी तबीयत, एक महिला की मौत, 5 की हालत गंभीर

एक अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक साथ कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। इसमें से एक महिला की मौत भी हो गई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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राजस्थान के कोटा के एक अस्पताल में बच्चे को जन्म देने के बाद एक महिला की मौत का सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल में लगभग एक दर्जन महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी कराई गई। इनमें से 6 की तबीयत कुछ घंटे बाद बिगड़ने लगी। इसी में से एक महिला की मौत हो गई है और पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय सांसद और लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला भी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। ओम बिरला ने कहा है कि इस मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम बनाई गई है और एक्सपर्ट डॉक्टर भी बुलाए गए हैं।

 

अस्पताल में पहुंचे ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत और पांच अन्य महिलाओं में गंभीर संक्रमण होने की घटना दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय मेडिकल टीम बनाई गई है।  उन्होंने कहा कि एक्सपर्ट डॉक्टरों की एक टीम भी कोटा पहुंचने वाली है और वह टीम यहां के डॉक्टरों के साथ समन्वय करके महिलाओं को बेहतर उपचार उपलब्ध कराएगा। बताया गया है कि अस्पताल में सोमवार देर रात से मंगलवार तड़के के बीच सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली छह महिलाओं की ऑपरेशन के आठ से 10 घंटे बाद तबीयत बिगड़ गई थी।

 

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क्यों हुई ऐसी परेशानी?

तबीयत बिगड़ने के बाद इन महिलाओं को नेफ्रोलॉजी वार्ड में शिफ्ट किया गया, जबकि उनके नवजात शिशुओं को अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई में ले जाया गया। इन महिलाओं में से एक की मंगलवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक महिला की पहचान चित्तौड़ जिले के भैंसरोडगढ़ की निवासी पायल (26) के रूप में हुई है। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रधानाचार्य और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. नीलेश जैन ने पत्रकारों से कहा कि सोमवार शाम कम से कम 12-13 गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन से प्रसव हुआ था जिनमें से छह की हालत ऑपरेशन के आठ से 10 घंटे बाद बिगड़ने लगी। उनका ब्लड प्रेशर और प्लेटलेट कम हो गए और पेशाब रुकने की समस्या हुई जो गुर्दे में संक्रमण का संकेत देता है।

 

उन्होंने बताया कि इनमें से एक महिला की मंगलवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। डॉक्टर नीलेश जैन ने बताया कि मौत के कारण का पता लगाने के लिए डेथ ऑडिट कमेटी गठित की गई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं से जूझ रही पांच महिलाओं को नेफ्रोलॉजी वार्ड में शिफ्ट किया गया है और उन्हें विशेष चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने के लिए डॉ. विकास खंडेलिया की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम बनाई है। उन्होंने बताया कि डॉ. सुरेश दुलारा के नेतृत्व में एक अन्य चिकित्सा दल महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के कारणों की जांच करेगा। डॉ. नीलेश जैन ने आगे कहा, ‘सभी पांच महिलाओं की हालत स्थिर है लेकिन 72 से 96 घंटे तक उन्हें खतरे से बाहर घोषित नहीं किया जा सकता।'

 

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क्या बोले डॉक्टर?

मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल आर पी मीणा ने इस घटना के बारे में कहा है, 'जिस मरीज की मौत हुई है, उनके लिए हमें बहुत दुख है और उनके परिवार के प्रति सहानुभूति है। जो पांच मरीज गंभीर रूप से बीमार हैं, हम कारण नहीं बता सकते हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि पचा लगा सकें कि क्या कारण हैं। मरीज आते हैं तो हम अलग-अलग लेवल पर काम करते हैं। इंजेक्शन लगाते हैं, फ्लूइड लगाते हैं, ऑपरेशन करते हैं, पोस्ट डिलीवरी मैनजमेट भी करते हैं। पूरा प्रशासन यही ढूंढ रहा है ताकि आगे किसी को ऐसी दिक्कत न हो। जो मरीज बीमार हैं उन पर एक खास टीम नजर रख रही है ताकि वे जल्दी से रिकवर कर सकें। हम इसकी जांच भी करवा रहे हैं।'


उन्होंने आगे कहा, 'वही इंजेक्शन कई और लोगों को भी लगा है और उन्हें कुछ नहीं हुआ। इसलिए हम अभी यह नहीं कह सकते कि किसी एक दवा या इंजेक्शन की वजह से ऐसा हुआ है। फिर भी हमने उस बैच की दवाओं, इंजेक्शन और फ्लूइड को हटा दिया है और उसकी जांच भी कर रहे हैं।' 

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