उत्तर प्रदेश के जिला आगरा में राजस्व अभिलेखों में 75 वर्षीय वृद्धा को मृत दर्शाकर उसकी जमीन दूसरे लोगों के नाम दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। खेरागढ़ तहसील में सोमवार को वृद्धा गीता देवी खुद तहसील पहुंचीं और अधिकारियों के सामने अपनी फरियाद रखते हुए कहा कि 'साहब, मैं जिंदा हूं।' पति की मौत के बाद जमीन अपने नाम कराने के लिए प्रयास कर रही वृद्धा का आरोप है कि कागजों में उसे मृत दिखाकर उसकी जमीन दूसरे लोगों के नाम कर दी गई। मामला सामने आने के बाद एसडीएम नरेंद्र गंगवार ने तहसीलदार को जांच के आदेश दिए हैं।
गीता देवी ने बताया कि उनके पति की वर्ष 2015 में मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने और उनके बेटे सिंधी ने जमीन अपने नाम कराने के लिए कई बार प्रयास किया लेकिन जमीन उनके नाम नहीं की गई। वृद्धा के मुताबिक उक्त जमीन उनके पति ने वर्ष 1998 में खेरागढ़ के गड़रपुरा में खरीदी थी। इसके बाद भी राजस्व अभिलेखों में जमीन उनके नाम दर्ज नहीं की गई।
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29 अप्रैल को चार भाइयों के नाम दर्ज हुई जमीन
पीड़िता के अनुसार उनकी जमीन 29 अप्रैल 2026 को खेरागढ़ के एक गांव निवासी चार भाइयों के नाम दर्ज कर दी गई। आरोप है कि जमीन को अपने नाम कराने के बाद संबंधित लोगों ने उसी भूमि के आधार पर बैंक से ऋण भी ले लिया। जब वृद्धा को इस पूरे मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने अधिकारियों से शिकायत की और अपने जिंदा होने का प्रमाण देते हुए जमीन वापस अपने नाम दर्ज कराने की मांग की।
गीता देवी ने एसडीएम के सामने अपनी शिकायत में कहा कि वह जीवित हैं लेकिन राजस्व अभिलेखों में उन्हें मृत दर्शा दिया गया। उनका आरोप है कि इसी आधार पर उनकी जमीन दूसरे लोगों के नाम कर दी गई। वृद्धा की शिकायत के बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया तो राजस्व विभाग में भी हलचल मच गई।एसडीएम नरेंद्र गंगवार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार सुरभि राय को जांच के आदेश दिए हैं।
SDM ने कहा कि वृद्धा को मृत दर्शाकर जमीन दूसरे के नाम किए जाने की शिकायत मिली है। मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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खंगाले जाएंगे जमीन से जुड़े सभी अभिलेख
अब जांच में जमीन की मूल खरीद, राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाम, नामांतरण की प्रक्रिया और 29 अप्रैल 2026 को चार भाइयों के नाम जमीन दर्ज किए जाने से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला जाएगा। इसके साथ ही जमीन के आधार पर बैंक से लिए गए लोन की भी जानकारी जुटाई जा सकती है। तहसीलदार की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वृद्धा को राजस्व रिकॉर्ड में मृत किस आधार पर दर्ज किया गया और जमीन दूसरे लोगों के नाम कैसे पहुंची।