उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े शनिवार को अयोध्या पहुंचे। जब वह अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे तो पार्टी के नेताओं ने उनका स्वागत किया। स्वागत करने वालों की कतार में कई नेता थे, लेकिन राजनीतिक पंडितों की निगाहें अभय सिंह और इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी पर टिक गईं।
एयरपोर्ट पर दोनों विनोद तावड़े के पीछे-पीछे चलते नजर आए। दोनों का एक साथ दिखना इसलिए दिलचस्प है, क्योंकि उनके बीच लंबे समय से राजनीतिक रार चल रही है। फिलहाल दोनों ही नेता अयोध्या की गोसाईंगंज विधानसभा सीट से 2027 का चुनाव लड़ना चाहते हैं।
अभय सिंह वर्तमान में अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक हैं। 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने की वजह से उन्हें समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। बीते 14 अक्टूबर को अमेठी के गौरीगंज में बीजेपी के एक बड़े आयोजन के दौरान अभय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था।
वहीं, इंद्र प्रताप तिवारी साल 2016 से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। साल 2017 में वह बीजेपी के टिकट पर गोसाईंगंज के विधायक बने थे। हालांकि, 2021 में फर्जी मार्कशीट मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
दोनों की नजर गोसाईंगंज पर
अभय सिंह और खब्बू तिवारी के लिए गोसाईंगंज वह मछली है, जिसकी आंख को उन्हें हर हाल में भेदना है। अभय सिंह गोसाईंगंज के वर्तमान विधायक हैं, वहीं इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी इस सीट के पूर्व विधायक हैं। साल 2017 में खब्बू तिवारी ने इस सीट पर अभय सिंह को हराया था, जबकि 2022 में अभय सिंह ने खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी को शिकस्त दी थी।
इस बार खब्बू तिवारी अभय सिंह से हिसाब बराबर करना चाहते हैं। हालांकि, पिछली बार अभय सिंह समाजवादी पार्टी में थे, इसलिए दोनों के बीच मुकाबला आमने-सामने का था, लेकिन अब बीजेपी में ही दोनों के बीच सियासी उठापटक देखने को मिल सकती है।
खब्बू तिवारी से जब पूछा गया कि वह अगला विधानसभा चुनाव कहां से लड़ेंगे तो उन्होंने गोसाईंगंज को अपनी कर्मभूमि बताते हुए यहीं से चुनाव लड़ने की बात कही थी। दूसरी ओर अभय सिंह के समर्थक भी दावा कर रहे हैं कि वह गोसाईंगंज से ही चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में बीजेपी में अभय सिंह की एंट्री पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
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अभय सिंह बनाम खब्बू तिवारी, विवाद पुराना है
अभय सिंह और खब्बू तिवारी के बीच सियासी जंग साल 2012 में शुरू हुई थी। 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई गोसाईंगंज विधानसभा सीट पर दोनों पहली बार आमने-सामने आए थे। अभय सिंह सपा और खब्बू तिवारी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। पहली लड़ाई में खब्बू तिवारी को मुंह की खानी पड़ी। अभय सिंह ने यह चुनाव 58,681 वोटों से जीत लिया।
पांच साल बीत गए। वक्त के साथ हालात भी बदल चुके थे। खब्बू तिवारी ने साल 2016 में बहन जी यानी मायावती का साथ छोड़कर कमल का दामन थाम लिया था। सपा ने अगले चुनाव में अपने मौजूदा विधायक को फिर से टिकट दिया।
2017 के विधानसभा चुनाव में खब्बू तिवारी और अभय सिंह एक बार फिर आमने-सामने थे। इस बार खब्बू तिवारी ने अभय सिंह को पटखनी देकर हिसाब बराबर कर लिया। इस चुनाव में खब्बू तिवारी ने 11,620 वोटों से जीत दर्ज की थी।
2022 में क्या हुआ?
खब्बू तिवारी अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। साल 2021 में फर्जी मार्कशीट मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद अगले चुनाव में खब्बू तिवारी ने अपनी पत्नी आरती तिवारी को टिकट दिलवाया। लेकिन एक बार फिर जीत अभय सिंह को मिली। खब्बू तिवारी शिद्दत से 2027 के विधानसभा चुनाव का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच उनका
अखिलेश यादव
की समाजवादी पार्टी से संपर्क टूट गया और उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली।
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साथ दिखने से बदलेंगे राजनीतिक समीकरण?
विनोद तावड़े से मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं का एक साथ नजर आना इस पूरे घटनाक्रम में एक नया पहलू है। अब तक जहां दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच खींचतान की चर्चा होती रही है, वहीं इस तस्वीर ने दोनों नेताओं के रिश्तों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। जब अभय सिंह ने बीजेपी ज्वाइन की थी तो खब्बू तिवारी ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के आने से अगर पार्टी मजबूत होती है तो यह स्वागत योग्य है।
हालांकि एक ही तस्वीर में नजर आने से यह साबित नहीं होता कि दोनों के बीच मतभेद खत्म हो गए हैं। न ही इससे गोसाईंगंज सीट पर किसी एक की दावेदारी तय होती है। लेकिन अभय सिंह के बीजेपी में आने और खब्बू तिवारी के गोसाईंगंज से चुनाव लड़ने के ऐलान के बीच यह मुलाकात राजनीतिक रूप से अहम जरूर है। अब देखना होगा कि यह साथ आना सिर्फ एक मुलाकात तक सीमित रहता है या दल के साथ दिल भी मिलने की कवायद होती है।