समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव
8 अक्टूबर को अयोध्या दौरे पर पहुंचे। यहां वह पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय 'पवन' के घर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। वहां उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जमकर हमला बोला। अखिलेश ने कविता के कुछ पंक्तियों के जरिए बीजेपी पर सवाल किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मानवता की रक्षा करने की जिम्मेदारी सभी की है। हमें इससे पीछे नहीं हटना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को अयोध्या से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती भी दे डाली। हालांकि, इस पूरे दौरे के दौरान रामलला के दर्शन न करने को लेकर अयोध्या के संतों और बीजेपी नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर अयोध्या के निवासियों के घर और दुकानें उजाड़ी गई हैं। उन्होंने वादा किया कि इनकी सरकार बनने पर किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। अयोध्या के विकास का पहला हक स्थानीय लोगों को मिलेगा। उन्होंने महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये देने की योजना का भी जिक्र किया।
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अखिलेश ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने अपने अयोध्या दौरे में बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री को अयोध्या से ही चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली। बड़े-बड़े दावे करने वाले सीएम खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं। उनके लिए तो मैदान खाली है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल को अयोध्या में नया प्रत्याशी तक नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, 'मानवता की रक्षा है सामूहिक जिम्मेदारी, जब भेदभाव के शूल का चुभना रहे जारी। अपमानों का बने निशाना दुखी मां-नारी, युवाओं के सपनों पर तलवार चले दुधारी। जब सत्ता करे अत्याचार वंचितों पर भारी, तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी!' उन्होंने राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितता और चोरी के मुद्दे को भी उठाया। अखिलेश पूर्व मंत्री के घर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में शामिल हुए। साथ ही कार्यकर्ताओं से संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम में कुछ धार्मिक कपड़े भी पहने और त्रिशुल भी उठाया।
रामलला के दर्शन से दूरी
आपको बता दें कि साल 2022 से 2026 के बीच कई बार अयोध्या आने के बावजूद अखिलेश यादव राम मंदिर नहीं गए। महामंडलेश्वर गिरीश दास और हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इनकी श्रद्धा कभी राम के प्रति नहीं रही। संतों ने जनता से ऐसे लोगों से सावधान रहने की अपील की।
बीजेपी विधायक वेद प्रकाश गुप्ता और महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि रामनगरी आकर भी रामलला से दूरी बनाना उनकी सोच को दिखाता है। पूर्व सांसद लल्लू सिंह और अन्य नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि अयोध्या की जनता रामसेवकों पर हुए पुराने घटनाक्रमों को भूली नहीं है। इसीलिए सपा नेता मंदिर के वैभव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।