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लखनऊ अग्निकांड: चार मौजूदा DM समेत दर्जनों IAS, PCS अफसरों पर गिर सकती है गाज

अलीगंज अलीगंज अग्निकांड में जांच कर रही एसआईटी निर्णायक दौर पर पहुंच चुकी है। जांच में वर्तमान नगर आयुक्त, मैनपुरी, बहराइच, मिर्जापुर, बलिया के डीएम सहित कई अफसरों की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं।

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लखनऊ कोचिंग में लगी आग, Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी में हुए भीषण अग्निकांड की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने एसआईटी को नौ आईएएस, नौ पीसीएस अधिकारियों सहित 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची सौंप दी है। सूची में लखनऊ के नगर आयुक्त गौरव कुमार, मैनपुरी के डीएम इंद्रमणि त्रिपाठी, बहराइच के डीएम अक्षय त्रिपाठी, मिर्जापुर के डीएम पवन गंगवार और बलिया के डीएम एमपी सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जांच में लापरवाही या नियमों की अनदेखी साबित होने पर इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है।

 

एलडीए की ओर से एसआईटी को सौंपी गई सूची में वर्तमान नगर आयुक्त गौरव कुमार, मैनपुरी के डीएम इंद्रमणि त्रिपाठी, बहराइच के डीएम अक्षय त्रिपाठी, मिर्जापुर के डीएम पवन गंगवार और बलिया के डीएम एमपी सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा स्थानीय निकाय निदेशालय में अपर निदेशक रितु सुहास का नाम भी जांच के दायरे में है। वहीं, एलडीए में विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शिवाकांत द्विवेदी, गिरीश चंद्र वर्मा और सत्येंद्र यादव के नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं।

9 PCS अधिकारियों पर भी जांच की आंच

एसआईटी को भेजी गई सूची में पीसीएस अधिकारी अमित राठौर, विपिन शिवहरे, श्रद्धा चौबे, प्रिया सिंह, संगीता राघव, प्रभाकर सिंह, डीके सिंह, विश्व भूषण मिश्र और सुशील प्रताप सिंह के नाम भी शामिल हैं। ये सभी अलग-अलग समय में एलडीए के प्रवर्तन और प्रशासनिक पदों पर तैनात रहे हैं।

 

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आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के अलावा 14 अधिशासी एवं सहायक अभियंता, 52 अवर अभियंता, प्राधिकरण सेवा के वरिष्ठ अधिकारी उप सचिव मथुरेश कुमार, रविंद्र सिंह, राजीव कुमार तथा स्थानीय निकाय सेवा के उप सचिव अतुल कृष्ण सिंह सहित 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

 

एसआईटी वर्ष 2016 से 2024 के बीच जोन-4 और जोन-5 में तैनात रहे अधिकारियों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। जांच इस बात पर केंद्रित है कि अवैध भवन का निर्माण, उसका व्यावसायिक उपयोग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इतने वर्षों तक कैसे होती रही तथा जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

 

15 लोगों की मौत के बाद सरकार सख्त

22 जून को अलीगंज सेक्टर-डी स्थित अवैध भवन में लगी भीषण आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद गठित एसआईटी लगातार दस्तावेजों, फाइलों और तैनाती के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

 

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रिपोर्ट के बाद तय होगी जवाबदेही

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी जल्द अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। रिपोर्ट में जिन अधिकारियों की लापरवाही, कर्तव्य में चूक या नियमों की अनदेखी सामने आएगी, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई, निलंबन और अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि अलीगंज अग्निकांड की जांच केवल हादसे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही की जवाबदेही भी तय करेगी।

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