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मुंबई यूनिवर्सिटी में आनंद पटवर्धन को घुसने क्यों नहीं दिया? समझिए पूरा मामला

मुंबई यूनिवर्सिटी में फिल्ममेकर आनंद पटवर्धन को रोक दिया गया है। छह महीने से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बौद्ध भिक्षु भदंत विमंसा के समर्थन में पहुंचे थे।

Filmmaker Anand Patwardhan

फिल्ममेकर आनंद पटवर्धन, Photo Credit: Wikipedia

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मुंबई यूनिवर्सिटी के कालिना कैंपस में डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर आनंद पटवर्धन को प्रवेश करने से रोक दिया है। रिसर्च स्टूडेंट राजेश बंखांडे जो अब बौद्ध भिक्षु बनकर भदंत विमंसा के नाम से जाने जाते हैं। आनंद पटवर्धन भदंत विमंसा के समर्थन में कॉलेज पहुंचे थे। भदंत विमंसा पिछले छह महीनों से विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस घटना के सामने आने के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

 

जानकारी के अनुसार, आनंद पटवर्धन जब कालिना कैंपस के मुख्य द्वार पर पहुंचे तो सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन को आनंद पटवर्धन के आने की कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद आनंद पटवर्धन को कैंपस के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

 

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फिल्ममेकर को रोकने पर उठे सवाल

इस घटना पर सामाजिक कार्यकर्ता और लोकशाहीर संदीप गायकवाड़ ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ फिल्ममेकर को कैंपस में प्रवेश से रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनके अनुसार यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चिंता पैदा करती है।

कैंपस गेट पर ही भदंत विमंसा से मिले आनंद पटवर्धन

आनंद पटवर्धन ने इस मामले पर कहा कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि आखिर उन्हें कैंपस में प्रवेश से क्यों रोका गया। उन्होंने बताया कि वह भदंत विमंसा से मिलने और उनके शांतिपूर्ण आंदोलन के प्रति समर्थन जताने आए थे। आनंद पटवर्धन ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ही भदंत विमंसा से मुलाकात की। उन्होंने भदंत विमंसा को एक गुलाब का फूल देकर एकजुटता और समर्थन का संदेश दिया है। साथ ही उनके स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी ली है।

 

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मुंबई यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?

वहीं इस पूरे मामले पर मुंबई यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि उन्हें आनंद पटवर्धन के आने की कोई सूचना नहीं थी। प्रशासन का कहना है कि यदि उन्हें पहले से जानकारी दी जाती, तो वे उनका स्वागत करते। इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध के अधिकार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र संगठन इस मामले को लेकर सवाल उठा रहे हैं और प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।

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