असम में विधानसभा चुनाव से पहले महिला सशक्तीकरण को लेकर सरकार ने अपनी कोशिशें और तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजना ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान’ एक बार फिर चर्चा में है। इस योजना के तहत राज्यभर की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सीधे उनके हाथों में पूंजी सौंपी जा रही है। सभी 35 जिलों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लाखों महिलाओं को 10 हजार रुपये की राशि दी जा रही है, जिससे वे अपना छोटा कारोबार शुरू कर सकें और परिवार की आमदनी बढ़ा सकें।
सरकार का दावा है कि इस पहल से न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं ‘लखपति’ बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। चुनावी माहौल के बीच इस योजना को महिला वोट बैंक से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जिससे इसका राजनीतिक और सामाजिक महत्व और बढ़ गया है।
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असम मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बताया कहा, ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (MMUA) के तहत अब तक 15 लाख से ज्यादा महिलाओं को 10 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है। यह योजना पिछले साल 1 अप्रैल को शुरू की गई थी। पहले इसका लक्ष्य 32 लाख महिलाओं तक पहुंचने का था लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 40 लाख कर दिया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 8 लाख महिलाएं अब लखपति बन चुकी हैं, जिससे परिवारों की आय बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।'
मुख्यमंत्री ने बोकाखाट में चेक वितरण कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि सरूपथार के बाद बोकाखाट में 27 हजार से ज्यादा महिलाओं को 10 हजार रुपये की मदद दी गई है और 15 लाख महिलाओं के सशक्त होने के साथ सरकार 40 लाख ‘लखपति बैदिओ’ यानी महिला उद्यमियों के लक्ष्य के और करीब पहुंच रही है।
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सरकार के अनुसार, दी गई धन राशि का सही इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को अगली कड़ी में रियायती ब्याज दर पर 25 हजार रुपये का लोन मिलेगा। इसके बाद सफल महिला उद्यमियों को तीसरी किस्त के रूप में 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी।
'असम धीरे-धीरे आत्म निर्भर बन रहा है..'
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम अब धीरे-धीरे निर्भर राज्य से आत्मनिर्भर बन रहा है और कई क्षेत्रों में योगदान देने लगा है। 40 लाख महिलाओं को लखपति बनाने की इस पहल से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस योजना को राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। पिछले साल नवंबर में मुख्यमंत्री ने कहा था कि असम की इस महिला सशक्तीकरण योजना को बिहार सरकार ने भी अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिए शुरू की गई बिहार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ में 75 लाख महिलाओं के खातों में सीधे 10 हजार रुपये भेजे गए।