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चलती CNG कार बनी आग का गोला, सेंट्रल लॉक नहीं खुला तो जिंदा जला ड्राइवर

बाराबंकी में चलती सीएनजी कार में आग लगने से एक शख्स की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। जांच में सामने आया कि कार के दरवाजे लाॅक होने के कारण चालक बाहर नहीं निकल पाया।

 Deceased Pradeep Kumar and the burnt car.

मृतक प्रदीप कुमार व जली हुई कार, Photo Credit : Social Media

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उत्तर प्रदेश के जिला बाराबंकी में चलती सीएनजी कार में आग लगने से 45 वर्षीय चालक प्रदीप कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। शुक्रवार देर रात लखनऊ एयरपोर्ट से सवारी छोड़कर घर लौट रहे प्रदीप की कार एस्वाबाद गांव के पास अचानक आग की चपेट में आ गई। आग लगते ही उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन कार के दरवाजे लॉक होने के कारण वह अंदर ही फंस गए। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। दमकल की टीम जब तक मौके पर पहुंची, तब तक चालक की जान जा चुकी थी। हादसे के बाद जली हुई कार के भीतर का दृश्य देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए।

यह दर्दनाक घटना बाराबंकी के सफदरगंज थाना क्षेत्र में सैदनपुर के पास एस्वाबाद गांव के निकट हुई। जानकारी के मुताबिक, प्रदीप कुमार लखनऊ एयरपोर्ट से सवारी छोड़ने के बाद अपनी कार से वापस लौट रहे थे। शुक्रवार देर रात करीब डेढ़ बजे उनकी चलती कार में अचानक आग लग गई।

 

आग लगने के बाद कार के भीतर धुआं भरने लगा और कुछ ही देर में लपटें तेज हो गईं। चालक ने कार से बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन दरवाजे नहीं खुल सके। कार में फंसे प्रदीप को संभलने और बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इस बीच आग पूरी गाड़ी में फैल गई।रात के समय कार में आग की लपटें देखकर आसपास के लोगों और राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने पुलिस और दमकल विभाग को घटना की सूचना दी। हालांकि, आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि चालक को बचाया नहीं जा सका।

चार महीने पहले खरीदी थी कार

कार के रजिस्ट्रेशन नंबर UP32 SA 8593 के आधार पर मृतक की पहचान 45 वर्षीय प्रदीप कुमार के रूप में हुई। वह बाराबंकी के प्यारेपुर क्षेत्र के रहने वाले थे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने करीब चार महीने पहले ही टाटा टियागो सीएनजी कार खरीदी थी और उससे टैक्सी चलाने का काम करते थे।

प्रदीप यात्रियों को लखनऊ एयरपोर्ट छोड़ने के बाद वापस लौट रहे थे। इसी दौरान यह हादसा हो गया। जिस कार को उन्होंने कुछ महीने पहले ही खरीदा था, वही उनके लिए जानलेवा साबित हुई।हादसे की जानकारी सामने आने के बाद कार में आग लगने और चालक के बाहर नहीं निकल पाने की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आग सबसे पहले कार के किस हिस्से में लगी और इसकी वजह क्या थी।

 

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सेंट्रल लॉक नहीं खुला, अंदर ही फंसे रह गए चालक

 

इस हादसे में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि आग लगने के बाद चालक कार से बाहर नहीं निकल सके। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कार के दरवाजे लॉक हो गए थे। इसके कारण वह अंदर ही फंसे रह गए और आग की चपेट में आ गए। चलती कार में आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए कुछ ही पल मिलते हैं।

यदि दरवाजे नहीं खुलें या कार के भीतर धुआं तेजी से भर जाए, तो स्थिति और खतरनाक हो सकती है। प्रदीप के मामले में भी दरवाजे लॉक होने की बात सामने आई है, लेकिन लॉक खुलने में परेशानी क्यों हुई, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।यह भी जांच का विषय है कि आग लगने के बाद कार की विद्युत व्यवस्था और लॉकिंग प्रणाली ने किस तरह काम किया। फिलहाल किसी तकनीकी खराबी को हादसे की निश्चित वजह नहीं माना जा सकता।

जली कार के भीतर का दृश्य देखकर सहम गए ग्रामीण

आग बुझने के बाद कार की हालत बेहद खराब थी। वाहन का अधिकांश हिस्सा जल चुका था और चालक का शरीर बुरी तरह झुलस गया था। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने कार के भीतर का दृश्य देखा तो वे सहम गए।  चालक के जले हुए अवशेष मिलने की बात सामने आई है।सूचना मिलने के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर कार्रवाई की। पुलिस ने कार के नंबर के आधार पर मृतक की पहचान की। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाने की बात कही गई है, ताकि घटनास्थल और जली हुई कार से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा सकें।

 

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आग कैसे लगी, जांच के बाद खुलेगा राज

सफदरगंज थाना प्रभारी अजय प्रकाश त्रिपाठी के मुताबिक, दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। कार में मौजूद चालक की जलने से मौत हुई है। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है और फॉरेंसिक जांच के जरिए हादसे से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की प्रक्रिया की जा रही है। फिलहाल आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। यह पता लगाना जरूरी होगा कि आग सीएनजी प्रणाली, विद्युत वायरिंग, बैटरी या किसी अन्य कारण से लगी थी। जांच के बिना किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।
चार महीने पुरानी कार में आग लगने और चालक के दरवाजे लॉक होने के कारण बाहर नहीं निकल पाने की घटना ने वाहन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच से ही स्पष्ट होगा कि आग कैसे लगी, दरवाजे क्यों नहीं खुले और क्या चालक को बचाने की कोई संभावना थी।

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