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बंगाल का 'टर्नओवर टाइकून' गिरफ्तार, दो साल से थी साइबर क्राइम की नजर

पवन रुइया पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े बिजनेसमैंन में से एक हैं। उन्हेंने पुलिस ने कोलकाता के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया।

Pawan Ruia

पवन रुइया। Photo Credit- Social Media

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने शेल कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े करोड़ों के ऑनलाइन फ्रॉड मामले में उद्योगपति पवन रुइया और उनके परिवार के लोगों को मिली अंतरिम सुरक्षा हटा दी। अंतरिम सुरक्षा हटाते हु रुइया की मुश्किलें बढ़ गईं। दरअसल, अंतरिम सुरक्षा हटते ही पश्चिम बंगाल पुलिस ने पवन को कोलकाता के बाहरी इलाके के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया।

 

एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि पवन रुइया लगभग दो साल से बिधाननगर और बैरकपुर साइबर क्राइम पुलिस के रडार पर थे। उन्हें न्यू टाउन में वेस्टिन होटल के बाहर से पकड़ा गया।

 

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कैसे कसा शिकंजा?

नवंबर 2025 में साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन फ्रॉड के एक मामले की जांच करते हुए दिल्ली से रुइया ग्रुप के चेयरमैन के एक करीबी को गिरफ्तार किया था। इसी गिरफ्तारी के बाद पनव रुइया और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का पता चला था। इनपर शेल कंपनी बैंक अकाउंट और क्रिप्टो वॉलेट का जाल बनाकर ऑनलाइन फ्रॉड का पैसा ब्लैक का व्हाइट करने का आरोप था।

 

पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, यह रैकेट 2024 की शुरुआत से चल रहा था। इसके जरिए फर्जी करीके से निवेश स्कीम और डिजिटल अरेस्ट करके पूरे भारत में 1,000 से ज्यादा लोगों को ठगा गया है।

शुरुआती जांच बिधाननगर में

शुरुआती जांच बिधाननगर में शुरू हुई थी। मगर, जांच का दायरा तेजी से आगे बढ़ता गया और पुलिस शिकंजा कसती गई। NCRP के डेटा से पता चला है कि पवन रुइया और उनके साथियों का नाम 31 अक्टूबर 2025 तक देश भर में साइबर फ्रॉड के 1,379 मामलों से जुड़ा था। इससे लोगों को 2,315 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

 

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जालसाजी के मामले में पहले भी गिरफ्तार

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में इस मामले में पवन रुइया, उनके बेटे राघव और बेटी पल्लवी को अग्रिम जमानत दे दी थी। पवन रुइया पर अब बिधाननगर और बैरकपुर पुलिस थानों में धोखाधड़ी, जालसाजी, सांगठनिक अपराध और आपराधिक साजिश जैसे कई आरोप हैं। इससे पहले पवन रुइया को 2016 में इंडियन रेलवे से जुड़े 50 करोड़ रुपये के जालसाजी और चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

 

पश्चिम बंगाल में कई कंपनियों को खरीदने और कई खस्ताहाल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) को फिर से खड़ा करने की कोशिश करने के लिए जाने जाने वाले रुइया को 'टर्नअराउंड टाइकून' का नाम मिला हुआ है। रुइया का सबसे पहले नाम साल 1993 में उछला। इसी साल उनकी कंपनी रुइया ग्रुप ने 225 साल पुरानी हेवी इंजीनियरिंग PSU जेसॉप एंड कंपनी को खरीद लिया था।

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