़बेंगलुरु के किसी भी झील में पानी अब पीने लायक नहीं रहा। कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) की 2025 की रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात सामने आई है। अप्रैल से नवंबर 2025 तक 147 जगहों पर पानी की जांच की गई, लेकिन एक भी झील पीने लायक (Class A) या नहाने लायक (Class B) पानी की श्रेणी में नहीं पहुंची।
रिपोर्ट के अनुसार, झीलों को पानी की गुणवत्ता के आधार पर क्लास में बांटा जाता है:
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क्लास A – बिना ट्रीटमेंट के पीने लायक पानी
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क्लास B – नहाने के लिए सुरक्षित
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क्लास D और E – बहुत ज्यादा प्रदूषित, इंसानों के इस्तेमाल के लिए अनुपयुक्त
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सारी झीलों की हालत खराब
दुर्भाग्य से, इस कोई भी झील क्लास A या B में नहीं आई। ज्यादातर झीलें D या E क्लास में रहीं, यानी भारी प्रदूषण से भरी हुईं।
शहर की मशहूर झीलें भी बुरी हालत में हैं:
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बेल्लंदूर झील – अप्रैल में E क्लास, गर्मियों में थोड़ा सुधार होकर D बनी, लेकिन नवंबर तक फिर E में चली गई।
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वरथुर झील – D और E के बीच बदलती हुई।
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हेब्बल झील – ज्यादातर महीनों में D, बाद में E हो गई।
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अन्य प्रभावित झीलें – मदीवाला, कैकोंडनहल्ली, कुंडलहल्ली, उल्सूर (सभी D/E), जबकि संकी टैंक ज्यादातर D में रही।
बोम्मनहल्ली और महादेवपुरा इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। वजह है तेज शहरीकरण और बिना इलाज का कचरा पानी में डालना।
पर्यावरण कार्यकर्ता मधुरी सुब्बाराव (फ्रेंड्स ऑफ लेक्स की को-फाउंडर) ने कहा, 'बेंगलुरु की कई झीलें अब पारिस्थितिक संकट के कगार पर हैं। आज कोई एक झील ऐसी नहीं है जहां पानी स्वस्थ हो, पारिस्थितिकी ठीक हो या जैव विविधता सुरक्षित हो। ज्यादातर झीलों का पानी जानवरों के लिए भी अनुपयुक्त है।'
सरकार से मांग
उन्होंने सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की गई है जिसके तहत एक खास झील बहाली टास्क फोर्स बनाना, प्रदूषण के स्रोतों की वैज्ञानिक जांच करना और नागरिक समूहों के साथ मिलकर काम करना शामिल है।
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गर्मियों का समय नजदीक है। बेंगलुरु में गर्मी के दिनों में ग्राउंडवाटर और टैंकरों पर ज्यादा निर्भरता होती है। लेकिन अब शहर की मुख्य सतही जल स्रोत (झीलें) इस्तेमाल के लायक नहीं बताई गई हैं। इससे लोगों के लिए सुरक्षित पानी मिलना और मुश्किल हो जाएगा।
बेंगलुरु, जिसे 'सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया' कहा जाता है, अब पानी के संकट से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना तुरंत कार्रवाई के स्थिति और खराब हो सकती है।