उत्तराखंड में धारी देवी मंदिर के पास अलकनंदा झील में दो बोट के बीच टक्कर का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल है। गनीमत रही कि हादसे के वक्त दोनों बोट पर सिर्फ चालक ही सवार थे। इस कारण बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों ने पहले भी मंदिर के समीप बोट संचालन पर आपत्ति जताई थी। मगर अभी तक प्रशासन ने कोई फैसला नहीं लिया। यहां बोट का संचालन नगर निगम कराता है।
वीडियो में दिख रहा है कि दो बोट झील के किनारे पर तेज रफ्तार में चल रही हैं। एक वोट काफी आगे है। वहीं दूसरी तेज रफ्तार में, लेकिन काफी पीछे है। तभी आगे चल रही बोट अचानक मुड़ती है। इसी दौरान पीछे आ रही बोट का चालक नियंत्रण खो देता है। उसकी बोट आगे चल रही बोट के ऊपर से निकल जाती है।
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सुरक्षा मानकों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि अगर दोनों बोट पर पर्यटक सवार होते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
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अब जगह बदलने पर विचार कर रहा नगर निगम
बता दें कि धारी देवी मंदिर के आसपास बोट संचालन पर स्थानीय लोग और मंदिर प्रशासन कई बार आपत्ति जता चुके हैं। लोगों का तर्क है कि बोट संचालन से होने वाले शोर-गुल का असर मंदिर के पूजा पाठ पर पड़ता है। मंदिर समिति के मुताबिक अब तक 200 से अधिक शिकायत मिल चुकी हैं। बावजूद इसके श्रीनगर नगर निगम बोटों का संचालन कर रहा है। अब श्रीनगर नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी ने कहा कि मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर बोट संचालन करने की योजना बनाई जा रही है।
कहां स्थित है धारी देवी का मंदिर?
धारी देवी का प्रसिद्ध मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में पड़ता है। यह मंदिर काली देवी को समर्पित है। मंदिर के समीप ही एक प्राचीन गुफा भी है। गढ़वाल लोगों के बीच यह मंदिर विशेष आस्था का केंद्र है। धारी देवी का मंदिर श्रीनगर से 15 किलोमीटर दूर अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। मंदिर झील के अंदर बना है। वहां तक पहुंचने का रास्ता भी अलग से बनाया गया है।