संजय सिंह, पटना। बिहार में शराबबंदी के बाद युवाओं के बीच सूखे नशा का प्रचलन बढ़ गया है। बढ़ते नशे के कारण छोटी-मोटी अपराध की घटनाएं बेतहाशा बढ़ रही हैं। उधर समस्तीपुर में पिता-पुत्र की मौत के बाद शराबबंदी को लेकर फिर से सवाल उठने खड़े हो गए है। नशा कारोबार को रोकने के लिए ग्रामीणों ने खगड़िया कलेक्ट्रेट में जमकर बवाल काटा। सैंकड़ों की संख्या में महिलाओं ने पूर्णिया के कस्बा थाने का घेराव किया।
बिहार में नशे का प्रचलन लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ते नशे के प्रचलन से परेशान लोग अब यह कहने लगे हैं कि बिहार के युवा भी पंजाब की राह पर चलने लगे हैं। सूखे नशे का सेवन बिहार के लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। स्थानीय लोग बढ़ते नशे को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें: हिमाचल के सिरमौर में भयानक हादसा, 60 मीटर गहरी खाई में गिरी बस, 8 की मौत
कैसे होती है शराब की तस्करी?
बिहार में शराबबंदी लागू है। शराब तस्करों ने पुलिस और उत्पाद विभाग को चकमा देने के लिए नया तरीका ढूंढ रखा है। आज भोजपुर में एक करोड़ रूपये मूल्य की विदेशी शराब पकड़ी गयी। यह शराब राजस्थान से आलू की बोरी में भर कर लाई जा रही थी। कुछ दिन पहले मधेपुरा के कुमारखंड में एक हाइवा ट्रक को पकड़ा गया। ड्राइवर गाड़ी छोड़ कर भाग गया। जब उस ट्रक की तलाशी ली गयी तो पत्थल के नीचे 305 कार्टन शराब बरामद हुई।
बिहार के नवादा में कोलकाता से आ रही बस की छत पर बोर में बंद कर शराब ला रहे थे। उत्पाद विभाग की टीम ने इसको पकड़ा। आरा में एक इंडिका कार को पकड़ा गया। उस कार की जब तलाशी ली गयी तो पता चला की शराब तस्करी के लिए अलग से तहखाना बना कर रखा गया है। बाढ़ पुलिस ने कुछ साल पहले वाशिंग मशीन और फ्रिज के भीतर शराब बरामद की थी। कुछ लोग दूध के ड्राम में शराब की बोतलों को रख कर भी तस्करी करते पकडे गए हैं।
कहां से आती है शराब ?
प्रदेश में सबसे ज्यादा शराब झारखण्ड और उत्तर प्रदेश से आती है। बिहार के कई जिलों की सीमा झारखण्ड और यूपी की सीमा को छूती है। इन राज्यों में शराब पर पाबन्दी भी नहीं है। सीमांचल के जिलों में पश्चिम बंगाल से शराब आसानी से पहुंच जाती है। नेपाल, असम और पश्चिम बंगाल के रास्ते सूखे नशे की एक बड़ी खेप यहां पहुंचती है। दूसरे राज्यों से तस्करी कर लायी गयी शराब की कीमत बिहार में दुगनी मिलती है। ज्यादा कमाई के लालच में कुछ लोगों ने इसे अपना व्यवसाय बना लिया है। गिरोह में गरीब घर की महिलाएं और बच्चों को शामिल किया गया है। पुलिस का संदेह बच्चों और महिलाओं पर नहीं जाता है। इसका लाभ उठा कर तस्कर धड़ल्ले से कमाई कर रहे है।
महुए से बने शराब की मांग बढ़ी
बिहार के कई जिलों में बड़े पैमाने पर महुए की शराब तैयार की जाती है। इस शराब को ज्यादा नशीला बनाने के लिए यूरिया खाद, कीटनाशक दवाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है। कई बार तो ऐसा भी देखा गया है की अवैध कारोबारी इस शराब में नींद की गोलियां भी मिला देते है। महुआ की आपूर्ति झारखण्ड से बड़े पैमाने पर होती है।
पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारी महुआ की आवाजाही पर रोक लगाने पर पूरी तरह विफल रहे हैं। कभी कभी कीटनाशक दवा के इस्तेमाल से शराब जहरीली हो जाती है। इसके सेवन से या तो लोगों की मौत हो जाती है या फिर आंख की रौशनी चली जाती है। कुछ लोग दूसरे राज्यों से स्प्रिट लाकर यहां शराब तैयार करते है। मधेपुरा में ऐसी नकली शराब फैक्टी पकड़ी भी गयी थी।
यह भी पढ़ें: कार से मारी टक्कर, तलवार लेकर पीछा किया, अमृतसर में कारोबारी से लूटा सोना
सूखा नशा के आदि हो रहे युवा
तस्करी की शराब की कीमत ज्यादा होने के कारण युवा सूखा नशा करना पसंद करते हैं। ब्राउन शुगर, गांजा, हेरोइन इनकी पहली पसंद होती है। बीते 24 दिसंबर को पुलिस ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छापा मार कर एक दिन में चार करोड़ रूपये मूल्य का सूखा नशा बरामद किया। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है की इस कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा है। छापामारी पटना, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, अररिया, और रक्सौल में की गयी थी।
युवाओं में सूखे नशे के बढ़ते परिचलन से अभिवावक परेशान है। पूर्णिया की महिलाओं ने कस्बा थाने का घेराव इस लिए किया की उनके घर के अधिकांश युवा इस नशे के आदि हो चुके हैं। रोजगार के बजाए वे अपने घर की बहुमूल्य वस्तुओं को बेच कर नशे का सेवन कर रहे है। चोरी की घटनाएं भी बढ़ गयी है। खगड़िया समहरणालय में कुछ ग्रामीणों ने घुस कर बवाल किया।
ग्रामीणों का कहना था की नशेड़ियों ने एक चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। सूखे नशे के कारण कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है। अब तो लोग यह कह रहे है सरकार ने जिस मंशा से शराब को प्रतिबंधित किया था उसका विपरीत असर युवाओं पर दिखने लगा है। बिहार के युवा भी अब पंजाब की राह पर चलने लगे है।