नेपाल में सितंबर 2025 में हुए हिंसक जेन-जी आंदोलन की आग अब भारत तक पहुंच चुकी है। आंदोलन के दौरान नेपाल की 25 से अधिक जेलों से फरार हुए 7 हजार से ज्यादा कैदी भारत-नेपाल सीमा पार कर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में फैल गए हैं। इसका सीधा असर अब बिहार के सीतामढ़ी जैसे जिलों में बढ़ती डकैती और तस्करी के रूप में सामने आने लगा है।
पिछले साल 8 और 9 सितंबर 2025 को नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ जेन-जी आंदोलन हिंसक हो गया था। हालात इतने बेकाबू हुए कि प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों ने जेलों को निशाना बना लिया। इस दौरान जेल से कुल 15 हजार कैदी फरार हो गए। इन फरार कैदियों में अब तक लगभग 8 हजार कैदी गिरफ्तार किए गए हैं या लौटे हैं। जबकि 7 हजार से अधिक अब भी लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या में आदतन अपराधी शामिल हैं, जो अब भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौती बन चुके हैं।
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सीतामढ़ी में बढ़ रहा क्राइम
नेपाल से सटे बिहार के सीतामढ़ी जिले में हाल के दिनों में डकैती की दो बड़ी वारदातों ने पुलिस को सकते में डाल दिया है। जांच में सामने आया है कि इन घटनाओं में नेपाल की जेलों से भागे कैदियों की संलिप्तता है। जानकारों के मुताबिक बेला और कन्हौली थाना क्षेत्रों में हुई डकैती के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्य मिले हैं। जिसमें नेपाल के जलेश्वर जेल से फरार कैदियों के हाथ होने की पुष्टि हुई है । इससे सीमावर्ती गांवों में दहशत का माहौल है।
फरार कैदी पहले शराब और मादक पदार्थों की तस्करी के धंधे में शामिल थे। अब वे डकैती और संगठित अपराध की ओर बढ़ रहे हैं। यह संकेत देता है कि सीमावर्ती इलाकों में एक नया आपराधिक नेटवर्क पनप रहा है।
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भारतीय कैदी भी थे नेपाल की जेलों में
नेपाल सरकार के अनुसार, फरार कैदियों में 540 भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इनमें कई ड्रग तस्करी, चोरी और धोखाधड़ी जैसे मामलों में सजा काट रहे थे। नेपाल ने इन कैदियों की जानकारी भारतीय एजेंसियों के साथ साझा की, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती राज्यों को अलर्ट किया। सीमा पर चौकसी बरती जा रही है। एजेंसियां सतर्क हो गई है। साथ ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसएसबी और स्थानीय पुलिस की गश्त तेज कर दी गई है।