बिहार में बाढ़ से 45 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होने का दावा किया गया है। इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने सरकार पर निशाना साधा है। पटना में पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। तेजस्वी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार की बात होती है लेकिन यहां तो दोनों ही इंजन में आग लगी हुई है।
तेजस्वी ने कहा, 'बिहार से NDA के सात मंत्री केंद्र में हैं और 31 लोकसभा सांसद हैं लेकिन इसके बाद भी बिहार के लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। केंद्र से कोई मदद नहीं मिल रही है। बिहार में 45 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। बिहार सरकार ने जुलाई में आकस्मिक निधि से 4000 करोड़ रुपये निकाले हैं। यह पैसा वेतन और दूसरे कामों के लिए निकाला गया। इससे पता चलता है कि बिहार का खजाना खाली है।'
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उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार से केंद्र में मंत्री होने के बावजूद वे राज्य के लिए केंद्रीय मदद नहीं दिला पा रहे हैं। तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए चल रहे किचन और रसोई की लिस्ट भी मांगी थी लेकिन सरकार वह भी नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में पूरी जानकारी नहीं दे रही है।
अमित शाह पर साधा निशाना
तेजस्वी ने कहा, 'जब कोसी में बाढ़ आई थी तब लालू प्रसाद यादव ने बिहार के लिए विशेष पैकेज दिलाया था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष
सोनिया गांधी
खुद बिहार आई थीं और बाढ़ पीड़ितों को सहायता राशि दी थी।
नरेंद्र मोदी
सरकार बिहार के साथ कैसा व्यवहार कर रही है यह इसी से समझा जा सकता है। गुजरात में थोड़ी बारिश होने पर भी राहत शिविर और हर तरह की मदद दी जाती है लेकिन बिहार में 45 लाख लोग बाढ़ में फंसे हैं और सरकार खामोश है।'
उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा के समय बीजेपी और केंद्र के नेता बिहार के लोगों को नजरअंदाज कर देते हैं। वहीं चुनाव आते ही प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक बिहार में दिखाई देने लगते हैं। तेजस्वी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ के स्थायी समाधान पर सरकार का ध्यान नहीं है और न ही बाढ़ के समय लोगों को पर्याप्त मदद मिल रही है।
तेजस्वी ने कहा, 'चुनाव के समय अमित शाह बिहार को बाढ़ से निजात दिलाने की बात करते हैं लेकिन आज वे कहां हैं? बाढ़ में फंसे 45 लाख लोगों को लेकर उनका एक बयान तक नहीं आया है। बिहार के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। बीजेपी शासित राज्यों से भी बिहार को कोई मदद नहीं मिल रही है। जो भी केंद्रीय मंत्री बिहार आ रहे हैं वे कोई सहायता राशि नहीं दे रहे हैं।'
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बाढ़ दौरे में नाव की हवा निकली
तेजस्वी ने अपने बाढ़ दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वह बाढ़ पीड़ितों के बीच गए थे तो उन्हें ऐसी नाव दी गई जिसकी हवा बीच नदी में ही निकल गई। गांव के लोगों ने किसी तरह उन्हें बचाया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और सरकार से पीड़ितों को मदद और सहायता राशि देने की मांग की। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे लोग बाढ़ पीड़ितों की परेशानी सामने लाने पर भी सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार के गलत कामों को जनता के सामने रखा जाता है तो सरकार के लोग इस पर गंभीरता नहीं दिखाते। उनके मुताबिक, सरकार का यह रवैया लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में तेजस्वी ने मीडिया पर हो रहे हमलों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, 'पत्रकारों के सवाल पूछने पर सरकार को बुरा लगता है और मंत्री से लेकर पुलिस तक पत्रकारों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार कर रहे हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों को परेशान किया जा रहा है क्योंकि सरकार में बैठे लोग सच देखना नहीं चाहते। गौरतलब है कि पिछले दिनों बाढ़ की खबरों की रिपोर्टिंग के दौरान कुछ पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आई थीं। सहरसा में भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों पर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगा था।