बिहार के किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब राज्य में पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय पौधों की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 100 हेक्टेयर में औषधीय पौधों की खेती का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी की खेती कराई जाएगी।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'बिहार में खेती को अलग-अलग फसलों से जोड़ने और किसानों के लिए नए विकल्प देने की दिशा में सरकार काम कर रही है।' औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए पारंपरिक फसलों के अलावा एक और विकल्प हो सकती है। इसी उद्देश्य से चुने गए क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती क्लस्टर में बढ़ावा दिया जा रहा है।
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100 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य
कृषि मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में MIDH के तहत औषधीय पौधों की खेती बढ़ाने के लिए 100 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 36 लाख रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत किसानों को 36 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी की खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्रों का चयन कर किसानों को इससे जोड़ा जाएगा। औषधीय पौधों की बाजार में मांग है और इनकी कीमत भी अच्छी मिलती है। बिहार की जलवायु औषधीय पौधों की खेती के लिए अनुकूल है। कई जिलों में पहले से इसकी खेती हो रही है लेकिन अब इसे व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा दिया जाएगा।'
सरकार ने औषधीय पौधों की खेती के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल तैयार किया है। एलोवेरा, अश्वगंधा और ब्राह्मी की खेती के लिए 5 हेक्टेयर प्रति राजस्व ग्राम या क्लस्टर और शतावरी की खेती के लिए 4 हेक्टेयर प्रति राजस्व ग्राम या क्लस्टर क्षेत्र चिन्हित किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा, 'क्लस्टर में खेती करने से इन क्षेत्रों में औषधीय पौधों का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे किसानों को खेती की तकनीक, उत्पादन से जुड़ी जानकारी और बाजार तक पहुंच बनाने में भी मदद मिलेगी। जब एक ही जगह पर कई किसान एक ही तरह की खेती करेंगे तो उन्हें बीज, खाद, तकनीक और बाजार उपलब्ध कराना आसान होगा। इससे किसानों का खर्च कम होगा और उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।'
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किसानों को मिलेगा फायदा
कृषि मंत्री ने कहा, 'औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना किसानों को खेती के नए विकल्प देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य में इसकी संभावनाओं को देखते हुए चुने गए क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से खेती का विस्तार किया जाएगा। आज के समय में एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी की मांग आयुर्वेद और फार्मा कंपनियों में बढ़ रही है। कॉस्मेटिक, दवा और हेल्थ सप्लीमेंट बनाने में भी इनका इस्तेमाल होता है। ऐसे में किसानों को इसका लाभ मिल सकता है। कंपनियां सीधे किसानों से खरीदारी भी कर सकती हैं।'
सरकार का लक्ष्य किसानों को पारंपरिक धान-गेहूं की खेती के साथ नकदी और औषधीय फसलों की ओर बढ़ाने का है ताकि उनकी आय बढ़ाई जा सके। औषधीय पौधों की खेती में पानी और लागत कम लगने की बात भी कही गई है। बताया गया कि योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को उद्यान विभाग से संपर्क करना होगा। चुने गए क्लस्टर के किसानों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग की ओर से किसानों को खेती से जुड़ा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।