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बिहार में बिना रजिस्ट्रेशन नहीं चलेंगे कोचिंग सेंटर, सरकार लाने जा रही नया कानून

बिहार में कोचिंग कारोबार को कंट्रोल करने के लिए सरकार अब एक नया कानून लाने जा रही है। इसके तहत अगर किसी कोचिंग सेंटर में 25 से ज्यादा छात्राएं हैं तो उस सेंटर को रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

Bihar govt introduces new draft law for coaching centre

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बिहार में तेजी से बढ़ते कोचिंग कारोबार पर अब सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। शिक्षा विभाग ने राज्यभर के कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए नए कानून का ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके लागू होने के बाद बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी बड़ा कोचिंग संस्थान नहीं चल सकेगा। सरकार का दावा है कि इससे छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलेगी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।

 

नए ड्राफ्ट के अनुसार जिन कोचिंग संस्थानों में 25 से अधिक छात्र पढ़ते हैं उन्हें अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं नियमों की अनदेखी करने पर 50 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड और रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई भी होगी। कोचिंग संचालकों को रजिस्ट्रेशन के लिए 15 हजार रुपये शुल्क देना होगा। यदि किसी संस्थान की कई शाखाएं हैं तो हर शाखा के लिए अलग रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। इसकी वैधता तीन वर्षों तक रहेगी। जिला स्तरीय जांच कमिटी की रिपोर्ट के बाद ही अनुमति दी जाएगी।

 

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छात्रों की सुविधाओं पर रहेगा फोकस

छात्रों की सुविधा पर खास ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने पढ़ाई और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कुछ जरूरी नियम बनाए हैं। अब हर छात्र के लिए कम से कम दो वर्ग फीट जगह देना जरूरी होगा। कोचिंग में पढ़ाने वाले टीचरों का ग्रेजुएट होना भी अनिवार्य होगा। इसके अलावा, एक बैच में कितने छात्र पढ़ेंगे, यह पहले से बताना होगा और बाद में उसमें किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी। यानी अब छोटे-छोटे कमरों में ठूंस-ठूंसकर सैकड़ों छात्रों को पढ़ाने की व्यवस्था पर रोक लग सकती है।

 

प्रस्तावित नियमों में कोचिंग संस्थानों के लिए काउंसलर रखना अनिवार्य किया गया है, ताकि छात्र तनाव और दबाव की स्थिति में उचित सलाह ले सकें। साथ ही स्टडी मटेरियल, नोट्स या अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर अलग से फीस वसूलने पर भी रोक लगाने की तैयारी है। यदि कोई छात्र बीच में कोर्स छोड़ता है, तो बची हुई फीस वापस करनी होगी।

 

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रिजल्ट का प्रचार नहीं कर सकेंगे कोचिंग संस्थान

सरकार ने कोचिंग संस्थानों के भ्रामक प्रचार पर भी सख्ती दिखाई है। नए नियम लागू होने के बाद संस्थान छात्रों के रिजल्ट और तस्वीरों का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव कम होगा और फर्जी सफलता के दावों पर भी अंकुश लगेगा।

 

नियमों के पालन और निगरानी के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर कमिटियां गठित की जाएंगी। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव इसकी अध्यक्षता करेंगे। कमिटी में पुलिस, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और कौशल विकास विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। साथ ही छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों को भी जगह दी जाएगी।

 

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जल्द बन सकता है कानून

शिक्षा विभाग ने इस ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि सुझावों पर विचार के बाद सरकार जल्द ही इसे कानून का रूप दे सकती है। अगर यह नियम लागू होता है, तो बिहार में कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और शिक्षा के नाम पर चल रही मनमानी पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।


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