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बिहार में 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार हुईं डीपीओ अनीता कुमारी

किशनगंज में डीपीओ अनीता कुमारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में और कौन-कौन शामिल है।

Woman accepting a bribe in office

प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit : ChatGpt

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बिहार के किशनगंज जिले में निगरानी विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (ICDS) की जिला परियोजना अधिकारी (डीपीओ) अनीता कुमारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई शुक्रवार को की गई। बताया जा रहा है कि यह रकम किसी बड़ी डील की पहली किस्त थी। गिरफ्तारी के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन में हलचल मच गई है।

 

निगरानी विभाग अब उस मामले की जांच करने में जुटा हुआ है जिसमें यह 50 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर लिए गए थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फाइल आगे बढ़ाने और भुगतान से संबंधित काम के बदले यह रकम मांगी गई थी। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या इस मामले में अन्य अधिकारी या बिचौलिए भी शामिल हैं।

 

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शिकायत से गिरफ्तारी तक

सूत्रों के मुताबिक, विभागीय कर्मचारी राजू ने निगरानी विभाग को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप था कि उसकी फाइल पास कराने के बदले 50 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं।

शिकायत की पुष्टि के बाद निगरानी टीम ने ट्रैप करने की योजना बनाई। तय दिन और समय पर जैसे ही पैसों का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर छापा मार दिया और अनीता कुमारी को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। मौके से कैश बरामद किया गया। उन्हें पूछताछ के लिए साथ ले जाया गया। देर शाम तक उनसे पूछताछ जारी रही।

पहले भी दागदार रहा कार्यकाल

अनीता कुमारी का नाम पहले भी विवादों में रहा है। बनमनखी में सीडीपीओ रहते हुए और पूर्णिया में प्रभारी डीपीओ के रूप में उनके कार्यकाल पर कई गंभीर आरोप लगे थे। कटिहार जिले में तत्कालीन डीपीओ की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ गबन, अवैध उगाही और पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज हुआ था। पूर्णिया प्रशासन ने एफआईआर कराई थी और पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल की थी। इसके बावजूद कार्रवाई की गति धीमी रही। विवादों के बीच उनका तबादला कर दिया गया। कटिहार से बनमनखी और फिर पूर्णिया तक उनकी पोस्टिंग ने विभागीय कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं।

रसूख के चर्चे

कटिहार के तत्कालीन डीएम की रिपोर्ट के बाद भी उन पर लंबे समय तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उलटा उन्हें पूर्णिया डीपीओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। विभागीय हलकों में इसे उनके रसूख से जोड़कर देखा जाता रहा। बनमनखी में उनके कार्यकाल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में अनियमितता और मनमानी की शिकायतें सामने आई थीं। कथित तौर पर बिचौलियों की सक्रियता की भी चर्चा होती रही। बाद में उन्हें निलंबित किया गया, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर पद पर सक्रिय हो गईं।

जारी रहा सिलसिला

किशनगंज में पद संभालने के बाद भी कथित तौर पर उनकी पुरानी कार्यशैली जारी रही। कार्यालय में काम कराने के लिए सेटिंग और मध्यस्थों की चर्चा आम थी। कई कर्मियों और जनप्रतिनिधियों ने अनियमितताओं की शिकायत की लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

 

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