बिहार की पटना हाई कोर्ट ने बिहार विधानसभा के 42 विधायकों को चुनाव में गलत हलफनामा दायर करने के संबंध में नोटिस भेजा है। हाई कोर्ट ने हलफनामे पर जवाब मांगा है। 42 विधायकों की लिस्ट में स्पीकर प्रेम कुमार से लेकर ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव तक का नाम शामिल है। चेतन आनंद और अमरेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं के भी नाम भी इस लिस्ट में है।
विधायकों पर आरोप है कि इन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में भ्रामक जानकारियां दीं हैं। हारने वाले प्रत्याशियों ने हाई कोर्ट में, जीते विधायकों के खिलाफ याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इस संबंध में तय सीमा के अंदर विधायकों से जवाब मांगा है।
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विधायकों ने क्या कहा है?
विधायकों का कहना है कि वे अपना जवाब हाई कोर्ट में दाखिल करेंगे। जिन पर आपत्ति है, उनसे संबंधित विवरण, अब अदालत में ही बताएंगे। विधायकों पर वोट चोरी के भी आरोप लगे हैं।
मामला क्या है?
बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजे 14 नवंबर को आए थे। कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि उनकी वोट चोरी हुई है, अयोग्य उम्मीदवार, गलत जानकारी देने के बाद भी जीत गए। अब विधायक अपना जवाब हाई कोर्ट में दाखिल करेंगे।
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अगर गलत जानकारी दी तो क्या होगा?
रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट 1951 की धारा 125A गलत हलफनामा दायर करने से संबंधित है। अगर कोई उम्मीदवार जानबूझकर, किसी अहम जानकारी को छिपाता है, गलत जानकारी देता है, नामांकन पत्र में शपथ पत्र दाखिल करने में असफल रहता है तो उसे 6 महीने तक जेल या जुर्माना या सजा हो सकती है। इस अधिनियम की धारा 100 कहती है कि अगर हलफनामा गलत पाया जाता है, गलत जानकारी देकर चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जाता है तो नतीजे अमान्य घोषित किए जा सकते हैं।
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क्यों बताना जरूरी होता है?
रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट 1951 की धारा 33 ए कहती है कि चुनावी हलफनामे में कुछ जानकारियों का विवरण देना अनिवार्य होता है। अगर किसी उम्मीदवार को 2 साल या उससे ज्यादा सजा मिलती है, कोई अगर आपराधिक मामला लंबित है, जिसमें आरोप तय हो चुके हैं, अगर इन जानकारियों को छिपाया गया तो धारा 125 ए के तहत कार्रवाई होती है।