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पटना से चीन तक मिथिला मखाना का कमाल, बिहार का 'सफेद सोना' मचाएगा धूम

बिहार से हाल ही में 5 टन हाई क्वालिटी वाले मखाने की पहली खेप पटना से चीन के लिए रवाना की गई। इससे स्थानीय मछुआरों और किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल गए हैं।

Makhana

मखाना, Photo Credit- Social Media

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बिहार की खेती और सहकारिता के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पटना के आईसीडी (ICD) सेंटर से 5 टन मखाने की एक बड़ी खेप चीन के लिए रवाना की गई है। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने इस खास मौके पर मखाने से भरे कंटेनर को हरी झंडी दिखाई। यह मखाना बिहार राज्य कोऑपरेटिव फिशरीज फेडरेशन (COFFED) के जरिए चीन की 'मानिंग रॉयल इक्विपमेंट कंपनी' को भेजा गया है।

 

इस सफलता के पीछे बिहार के मछुआरों के साथ-साथ 'रूट टू लीफ' जैसी सहयोगी कंपनियों का बड़ा हाथ माना जा है। COFFED के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने बताया कि यह निर्यात साबित करता है कि बिहार के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर रहे हैं। इससे न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' जैसे अभियानों को भी नई पहचान मिलेगी।

 

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जेब तक पहुंचेगा सीधा फायदा

इस एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा असर बिहार के उन हजारों मछुआरों और किसानों पर पड़ेगा जो मखाना उगाने में दिन-रात एक कर देते हैं। बिचौलियों के बिना सहकारी समितियों के जरिए किसानों को उनकी उपज का सही दाम और सीधी कमाई के साधन मिलेंगे। 

 

COFFED से जुड़ी 880 से ज्यादा समितियों के लाखों सदस्यों को इस अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे तौर पर जोड़ा जा रहा है। इस कामयाबी से यह माना जा रहा है कि मखाना प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के क्षेत्र में नए रोजगार पैदा होंगे। इससे बिहार एक 'निर्यात हब' के रूप में उभरेगा।

सेहत का खजाना है यह 'सुपरफूड'

दुनिया भर में मखाने की मांग इसके लाजवाब फायदों की वजह से बढ़ रही है। इसे 'फॉक्स नट' भी कहा जाता है और यह पोषक तत्वों का भंडार है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व होते हैं। 

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह कई बिमारियों जैसे डायबिटीज और गैस्ट्रो के मरीजों के लिए रामबाण है। इसके लगातार इस्तेमाल से दिल के सेहत का ख्याल कऱने मेें मदद मिलती है।

 

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कम कैलोरी होने की वजह से वजन घटाने वाले लोग इसे अपनी डाइट में प्रमुखता से शामिल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात की यह रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में बिहार का मखाना और मत्स्य उत्पाद दुनिया के हर कोने में अपनी धाक जमा लेंगे।

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