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बिहार में करोड़ों की चपत लगा गायब हो गईं माइक्रो फाइनांस कंपनियां, खेल क्या है?

बिहार के कई जिलों में माइक्रो फाइनांस कंपनियां लोगों को अपने शिकंजे में फांसकर उन्हें ठगने का काम कर रही हैं। लोग इसको लेकर लगातार शिकायतें कर रहे थे।

Bihar micro finance companies

प्रतीकात्मक तस्वीर। Photo Credit- Sora- AI

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संजय सिंह, पटना। बिहार सरकार ने गुंडा बैंक या माइक्रो फाइनांस कंपनियों पर शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है। हालांकि, शिकंजा कसने के पहले ही माइक्रो फाइनांस कंपनियां ग्राहकों को चपत लगाकर भागने लगी हैं। सात दिनों के भीतर मुंगेर, बांका और सहरसा जिलों से तीन कंपनियां करोड़ों की ठगी करके भाग चुकी हैं। तीनो कंपनियों के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। 

 

बताया गया है कि यह सभी कंपनियां ग्राहकों से लेन-देन में मनमानी करती हैं। इनके ब्याज के दर में भी कोई समानता नहीं रहती। जरूरतमंदों के मांग के हिसाब से ब्याज की दर घटती या बढ़ती हैं। बकाए राशि की वसूली के लिए ये कंपनियां गुंडों का भी इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों के बीच गुंडों का दहशत इतना रहता है कि कभी-कभी लोग भय से आत्महत्या तक कर लेते हैं। 

 

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मनमानी करती हैं ये कंपनियां

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रावधान के अनुसार कंपनियों को छोटा छोटा लोन देना है, लेकिन ये कंपनियां खाता खुलवाने और रोजगार शुरू करने के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के नाम पर राशि की ठगी भी कर लेते हैं। इन तीनों जिलों में उत्सव और सोनगिरी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने महिलाओं को लालच देकर करोड़ों की ठगी की और रातोंरात गायब हो गईं। 

पुलिस के पास नहीं है कोई लेखा जोखा 

यह कंपनियां जहां-तहां किराये का ऑफिस घर लेकर अपना कार्यालय खोलती हैं। इस कार्यालय में काम करने वाले कर्मियों का कोई लेखा-जोखा पुलिस के पास उपलब्ध नहीं रहता है। बांका केंद्रीय विद्यालय के पास सोनगिरी माइक्रो फाइनांस कंपनी ने अपना कार्यालय खोला था। मोटी रकम लोगों से ठगने के बाद इस कंपनी से जुड़े कर्मी रातोरात गायब हो गए। इसी तरह मुंगेर के हवेली खड़गपुर में भी उत्सव माइक्रो फाइनांस कंपनी ने अपना कार्यालय खोला था। महिलाओं को यह भी झांसा दिया गया था कि रोजगार शुरू करने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। 

 

महिलाओं से पैसे वसूलने के बाद कंपनी के कर्मी रातोरात फरार हो गए। सहरसा के बनगांव में भी उत्सव माइक्रो फाइनांस कंपनी के कर्मियों ने ही सैकड़ों महिलाओं के साथ ठगी की। महिला अब अपनी धनराशि वापस करने के लिए थाने का चक्कर लगा रही हैं, लेकिन पुलिस के सामने परेशानी इस बात की है कि उनके पास माइक्रो फाइनांस कंपनी से जुड़े कर्मियों का कोई ठिकाना नहीं है। पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है। 

 

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बक्सर के सुरेंद्र की हो रही तलाश

मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में माइक्रो फाइनेंस कंपनी के जरिए बीते 14 दिनों से ठगी का खेल चल रहा था। समूह लोन और घरेलू सामान दिलाने के नाम पर लोगों से रुपये वसूलने वाला इस गिरोह का मुख्य संचालक बक्सर निवासी सुरेंद्र प्रसाद था। वह अपने साथियों के साथ खड़गपुर क्षेत्र में सक्रिय था और घर-घर जाकर लोगों को लोन का झांसा देकर ठगी करता रहा, लेकिन लंबे समय तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। सुरेंद्र प्रसाद ने कंटिया बाजार में एक मकान किराए पर लेकर फर्जी कार्यालय खोला था। यह पूरी तरह पुलिस की जांच प्रक्रिया पर निर्भर करता है कि मामले की तह तक कैसे पहुंचा जा सकता है। 

 

इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमानुसार किसी भी फाइनेंस कंपनी या कार्यालय के संचालन की जानकारी संबंधित प्रशासन और पुलिस को देना अनिवार्य होता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सुरेंद्र प्रसाद ने फाइनेंस कार्यालय खोलने की कोई सूचना दी थी या नहीं। अगर सूचना नहीं दी गई थी, तो इतने दिनों तक फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा और पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। इधर पुलिस माइक्रो फाइनांस कंपनी के संचालक सुरेंद्र की तलाश कर रही है।

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