बिहार सरकार रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन को अधिक पारदर्शी और डिजिलट बनाने की कोशिश कर रही है। इस कोशिश में बिहार सरकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों ( ट्रेनी ऑफिसर) को प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (2025) बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए एक कार्यक्रम किया। यह कार्यक्रम राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित हुआ था। इन प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस प्रशिक्षण का उद्घाटन बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) के महानिदेशक अरविंद कुमार चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उनके साथ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, भू-अभिलेख और परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत और संस्थान के प्राचार्य दिव्य राज गणेश मौजूद रहें।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महानिदेशक ने कहा कि स्पष्ट भूमि अभिलेखों से संपत्ति विवाद से जुड़ी घटनाएं रुकेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में सर्वेक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है और ऐसे समय में प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए इस विषय की गहरी समझ पूरे प्रशासनिक करियर में बेहद उपयोगी साबित होगी।
'राजस्व प्रशासन सरकार का अहम हिस्सा'
अरविंद कुमार चौधरी ने राजस्व प्रशासन का महत्व समझाते हुए कहा कि, 'राजस्व प्रशासन राज्य सरकार के कामकाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। गांव से लेकर शहर तक, आम आदमी का सीधा जुड़ाव जमीन से है। इसलिए हर अधिकारी को सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी होना बहुत जरूरी है।'
प्रशिक्षु अधिकारियों को कार्यक्रम के बारे में बताते हुए बिपार्ड के महानिदेशक ने कहा कि, 'इस 10 दिन के प्रशिक्षण को सिर्फ औपचारिकता न समझें। हर विषय को गंभीरता से समझें और स्वयं करके सीखने का प्रयास करें। फील्ड में जाने पर आम लोगों से सीधे संवाद करें। उनकी समस्याओं को सुनें और समझें। प्रशिक्षण के दौरान जो समय मिल रहा है, उसमें जितना हो सके, सीखें। कुछ भी पूछना हो तो तुरंत पूछें। संकोच न करें। क्योंकि यही सीख आगे चलकर आपके जिलों में काम आएगी।'
'बिहार में जमीन को लेकर सबसे ज्यादा विवाद होते हैं। थानों में दर्ज होने वाले कई मामले और अदालतों में लंबित केसों का बड़ा हिस्सा जमीन विवाद से जुड़ा है। कई बार तो मामूली जमीन विवाद बड़ी आपराधिक घटना का रूप ले लेता है। ऐसे में स्पष्ट और सटीक भूमि अभिलेख इन समस्याओं को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। अमेरिका की डिजिटल व्यवस्था में घर बैठे डिजिटल माध्यम से किसी भी संपत्ति की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है और उसी आधार पर खरीद-बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। बिहार का राजस्व प्रशासन भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था की गई है। राजस्व सचिव जय सिंह राजस्व के विशेषज्ञ अफसरों में से हैं। आप सभी इस अवधि में उनसे ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं।'- अरविंद कुमार चौधरी, बिपार्ड महानिदेशक
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'झोले से लैपटॉप तक पहुंचा राजस्व प्रशासन'
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य में राजस्व से जुड़े कार्यों को पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से संचालित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि, 'करीब 10 वर्ष पहले तक राजस्व संबंधी कार्य झोले में कागज लेकर चलने तक सीमित थे, लेकिन आज वही काम लैपटॉप पर हो रहा है। यह बदलाव राजस्व प्रशासन में तकनीक के बढ़ते उपयोग और सरकार की इच्छाशक्ति को दर्शाता है। सर्वेक्षण का कार्य सही तरीके से पूरा होने के बाद बिहार के भूमि रिकॉर्ड पहले से कहीं अधिक स्पष्ट, सटीक और डिजिटल होंगे। इससे न केवल आम लोगों को अपनी जमीन की सही जानकारी मिलेगी, बल्कि राजस्व प्रशासन को भी मजबूती मिलेगी। यह राज्य की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा।'
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11 प्रशिक्षु IAS अधिकारी हो रहे शामिल
भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत ने प्रशिक्षु अधिकारियों को 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण के दौरान राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और फील्ड के अनुभवी लोग प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने की अपील की। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी प्रशिक्षु अधिकारियों का परिचय भी प्राप्त किया गया।
इस प्रशिक्षण में 2025 बैच के 11 सहायक समाहर्ता-सह-सहायक दंडाधिकारी शामिल हो रहे हैं। इनमें सौरव सिन्हा (मुजफ्फरपुर), अमित मीणा (भोजपुर), राज कृष्ण झा (पूर्वी चंपारण), नीलेश गोयल (गया जी), केतन शुक्ला (सहरसा), अंकुर त्रिपाठी (वैशाली, हाजीपुर), प्रिंस राज (नवादा), दीपक कुमार (पटना), कल्पना रावत (दरभंगा), फरकन्दा कुरैशी (बक्सर) और कुमुद मिश्रा (पूर्णिया) शामिल हैं।
इस अवसर पर सहायक निदेशक सुबोध कुमार, अनुदेशक विनय कुमार राय, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी पल्लवी और ऐमन फातिमा समेत कई अन्य अधिकारी मौजूद थे। 10 दिनों तक ये अधिकारी सर्वे, बंदोबस्त, खतियान, नक्शा, डिजिटल रिकॉर्ड और फील्ड सर्वे की बारीकियां सीखेंगे और फील्ड विजिट भी करेंगे।