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क्रेडिट कार्ड से बिजली बिल तक, ऐसे करते थे साइबर ठगी, पुलिस ने किया खुलासा

पटना में साइबर ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी क्रेडिट कार्ड, रिवॉर्ड प्वाइंट और बिजली बिल के नाम पर लोगों को ठगते थे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

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बिहार के पटना जिले में साइबर थाने की पुलिस ने करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, बैंक के रिवॉर्ड प्वाइंट दिलाने और बिजली बिल अपडेट कराने के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। तकनीकी जांच में इनके साइबर अपराध का नेटवर्क बिहार के अलावा कई राज्यों तक फैला होने की जानकारी मिली है।

 

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी इनके खिलाफ करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़ी कई शिकायतें मिली हैं। पुलिस अब इन शिकायतों को आपस में जोड़कर जांच कर रही है और गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, चेकबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और दूसरी चीजें बरामद की गई हैं।

 

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ऐसे करते थे ठगी

पुलिस की तकनीकी टीम ने जब आरोपियों के मोबाइल और दूसरे डिजिटल सामान की जांच की तो अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से जुड़े कई अहम सबूत मिले। जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य ठगी के लिए अलग-अलग बहानों का इस्तेमाल करते थे। गिरोह के सदस्य कभी एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देते थे तो कभी बैंक खाते के रिवॉर्ड प्वाइंट का फायदा दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क करते थे। बिजली बिल अपडेट कराने के नाम पर भी लोगों को ठगा जाता था। बातचीत के दौरान पीड़ितों से बैंकिंग और निजी जानकारी हासिल कर उनके खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।

 

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य पहले लोगों को फोन करते थे और खुद को बैंक अधिकारी बताते थे। वे कहते थे कि आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ गई है। इसे एक्टिवेट करने के लिए ओटीपी बताइए। कभी वे कहते थे कि आपके रिवॉर्ड प्वाइंट एक्सपायर हो रहे हैं। उन्हें कैश में बदलने के लिए भेजे गए लिंक पर क्लिक करिए। इसी तरह बिजली बिल अपडेट करने के नाम पर भी लोगों को लिंक भेजा जाता था। ओटीपी बताने या लिंक पर क्लिक करने के बाद पीड़ित के खाते से पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए जाते थे। इसके बाद रकम को कई खातों में घुमाकर निकाल लिया जाता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आरोपियों तक लोगों का डेटा कैसे पहुंचता था और ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी जाती थी।

 

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कई राज्यों में मिली शिकायतें

गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल और दूसरे डिजिटल सबूतों की जांच के साथ NCRP पर दर्ज शिकायतों का भी मिलान किया गया। इसमें कई राज्यों में साइबर ठगी से जुड़े मामले सामने आए हैं। शिकायतों में करोड़ों रुपये के लेन-देन की जानकारी भी मिली है। इससे गिरोह के बड़े नेटवर्क से जुड़े होने का पता चला है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, NCRP पर आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी शिकायतें दर्ज हैं। इन शिकायतों में ठगी का तरीका एक जैसा बताया गया है। इससे पुलिस को शक है कि यह गिरोह लंबे समय से लोगों को ठग रहा था।

 

पटना साइबर थाने में भी कई लोगों ने शिकायत की थी कि उनके क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर ठगी की गई है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में प्रतोष कुमार (26) शेखपुरा जिले के बरबीघा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। गुड्डू कुमार नालंदा जिले के हरनौत थाना क्षेत्र, अंशु कुमार नालंदा के नूरसराय थाना क्षेत्र और विक्की कुमार (31) पटना के कंकड़बाग थाना क्षेत्र का निवासी है। चारों की उम्र 26 से 31 साल के बीच है।

 

पुलिस के अनुसार, चारों आरोपी पहले छोटे-मोटे काम करते थे लेकिन ज्यादा पैसे कमाने के लालच में साइबर ठगी करने लगे। उन्होंने यूट्यूब और टेलीग्राम से ठगी के तरीके सीखे और बाद में अपना गिरोह बना लिया। वे टेलीग्राम चैनलों के जरिए लोगों का डेटा खरीदते थे। चारों के खिलाफ पटना साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ BNS और IT एक्ट की अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई की गई है। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस उनके बैंक खातों, मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है।


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