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बिहार पुलिस का बड़ा फैसला, हर थाने में बनेगा सामुदायिक पुलिस पदाधिकारी

बिहार पुलिस ने सामुदायिक पुलिसिंग को लेकर नई पहल शुरू की है। अब हर थाने में सामुदायिक पुलिस पदाधिकारी बनाया जाएगा और पुलिस आम लोगों से संपर्क कर उनकी समस्याओं का समाधान करेगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

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बिहार में अपराध रोकने और पुलिस व आम लोगों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए पुलिस ने सामुदायिक पुलिसिंग को लेकर बड़ा कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय ने इसे बेहतर तरीके से लागू करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब पुलिस सिर्फ अपराध होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि लोगों से सीधे जुड़कर उनकी समस्याएं समझेगी और अपराध रोकने पर भी ध्यान देगी।

 

पुलिस महानिदेशक सुनील कुमार ने बताया कि सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए पुलिस और आम लोगों के बीच लगातार संवाद स्थापित किया जाएगा। स्थानीय समस्याओं की पहचान की जाएगी और उनके समाधान में आम लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

 

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हर हफ्ते लोगों से मिलेगी पुलिस

खास बात यह है कि अब हर थाना और बीट स्तर पर स्थानीय लोगों से नियमित संपर्क और संवाद किया जाएगा। पहले पुलिस घटना होने के बाद मौके पर पहुंचती थी लेकिन अब नई पहल के तहत पुलिस पहले से ही इलाके में सक्रिय रहेगी। 

 

पुलिस अपने इलाके के प्रमुख लोगों, संस्थानों और संवेदनशील जगहों की जानकारी अपडेट रखेगी। इसमें स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, बैंक, एटीएम, धार्मिक स्थल, बाजार, बस स्टैंड और संवेदनशील मोहल्ले शामिल हैं। साथ ही लोगों से मिलने वाली शिकायतों, सुझावों और समस्याओं के जल्द समाधान पर भी जोर रहेगा।

 

थाना प्रभारी और बीट पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे हर हफ्ते अपने इलाके के लोगों से मिलें। उनकी समस्याएं सुनें और उनका समाधान करें। इससे पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम होगी और लोग बेझिझक अपनी बात पुलिस के सामने रख सकेंगे।

हर थाने में बनेगा पुलिस पदाधिकारी

इस नई व्यवस्था के तहत हर थाने में एक सामुदायिक पुलिस पदाधिकारी नामित किया जाएगा। यह अधिकारी थाना स्तर पर सामुदायिक पुलिसिंग की पूरी जिम्मेदारी संभालेगा। थाना स्तर पर सामुदायिक पुलिसिंग की पंजी भी रखी जाएगी जिसमें हर महीने की गतिविधियों का रिकॉर्ड दर्ज होगा।

 

किस गांव या मोहल्ले में बैठक हुई, कितने लोगों ने हिस्सा लिया, क्या समस्याएं सामने आईं और उनका क्या समाधान किया गया इसकी पूरी जानकारी पंजी में दर्ज की जाएगी। पुलिस मुख्यालय से इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। इस नई पहल में नशा मुक्ति अभियान से लेकर साइबर अपराध के प्रति जागरूकता तक कई गतिविधियां शामिल हैं। स्कूल और कॉलेजों में बाल सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। बच्चों को गुड टच-बैड टच, साइबर सुरक्षा, नशे से दूरी और ट्रैफिक नियमों के बारे में बताया जाएगा।

 

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर महिला पुलिस संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महिला पुलिस अधिकारी गांव-गांव जाकर महिलाओं से संवाद करेंगी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए संपर्क और सहायता कार्यक्रम चलाने के साथ वंचित और संवेदनशील समुदायों से भी पुलिस नियमित संपर्क करेगी। अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सूची थाने में रखी जाएगी और पुलिस नियमित तौर पर उनका हालचाल लेगी।

 

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पुलिसकर्मियों को मिलेगा इनाम

पंचायत प्रतिनिधियों और सरपंचों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। भूमि विवाद की रोकथाम, सड़क सुरक्षा और यातायात जागरूकता पर भी विशेष फोकस रहेगा। बिहार में ज्यादातर अपराध और मारपीट की घटनाएं भूमि विवाद से जुड़ी होती हैं। ऐसे में पहले से ही विवादों की पहचान कर उनका समाधान करने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए थाना स्तर पर शनिवार को होने वाले जनता दरबार और भूमि विवाद से जुड़ी बैठकों में सामुदायिक पुलिसिंग को भी जोड़ा जाएगा। सड़क सुरक्षा को लेकर स्कूल-कॉलेजों और चौक-चौराहों पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

 

पुलिस महानिदेशक सुनील कुमार के मुताबिक, इस पहल का मुख्य उद्देश्य अपराध की रोकथाम, लोगों को जागरूक करना, पुलिस पर विश्वास बढ़ाना और पुलिस-जन सहयोग को मजबूत करना है। सामुदायिक पुलिसिंग के काम की थाना, अनुमंडल और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा होगी। हर महीने एसपी स्तर पर और हर तीन महीने पर आईजी स्तर पर समीक्षा बैठक होगी। अच्छा काम करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। बेहतर काम करने वाले थानों और पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।


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