संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री आवास पर ही विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। बताया जा रहा है कि सभापति स्वयं सीएम आवास पहुंचे थे, जहां यह औपचारिकता पूरी की गई। इसके बाद अब नीतीश कुमार कभी भी सीएम पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं और उसके बाद दिल्ली जा सकते हैं। नीतीश कुमार की विदाई की तैयारी भले गी हो गई हो लेकिन बिहार की कमान किसे मिलेगी इसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
नीतीश कुमाप ने कल बिहार विधान परिषद की सदस्यता तो छोड़ दी लेकिन वह अभी भी सीएम बने हुए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत अगले छह महीने तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति 6 महीने से ज्यादा बिना विधानमंडल का सदस्य बने सीएम नहीं रह सकता। हालांकि, असली सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार इस समय का उपयोग सत्ता हस्तांतरण के लिए करेंगे, या फिर कोई बड़ा राजनीतिक दांव खेलने की तैयारी में हैं।
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नए सीएम का नाम तय नहीं
नीतीश के बाद बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथों में जाएगी, इसे लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। संभावित उत्तराधिकारियों की चर्चा जोरों पर है। मौजूदा डिप्टी सीएम और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उनकी संगठनात्मक पकड़ और पार्टी में मजबूत स्थिति उन्हें एक प्रमुख दावेदार बनाती है।
निशांत कुमार की चर्चा
नीतीश कुमार की जब बिहार से विदाई तय हुई उसी समय उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री हो गई। राज्य की सरकार में भूमिका को लेकर निशांत कुमार का नाम भी चर्चाओं में है। हालांकि, वह हाल फिलहाल ही राजनीति में आए हैं ऐसे में उन्हें सीएम बनाया जाए इसकी संभावना कम नजर आ रही है लेकिन राजनीतिक विरासत के आधार पर उनके नाम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव साबित हो सकता है।
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नीतीश के फैसले पर सबकी नजर
इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक और अहम खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा सीट से सोमवार को अपना त्यागपत्र सौंपा। यह कदम उन्होंने राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद संवैधानिक नियमों का पालन करते हुए उठाया है।
इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ मुख्यमंत्री का विधान परिषद से इस्तीफा, दूसरी ओर बीजेपी के बड़े नेता का विधानसभा से बाहर होना। दोनों घटनाएं संकेत दे रही हैं कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ पद परिवर्तन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक पुनर्संरचना है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नीतीश कुमार आखिरकार क्या फैसला लेते हैं। क्या वे सत्ता की बागडोर किसी नए चेहरे को सौंपेंगे या फिर खुद ही एक नई राजनीतिक पटकथा लिखेंगे। बिहार की राजनीति फिलहाल एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां हर कदम भविष्य की दिशा तय करेगा।