logo

मूड

ट्रेंडिंग:

पूर्णिया में पिता ने जिंदा बेटी का किया अंतिम संस्कार, पुतला जलाकर कराया पिंडदान

पूर्णिया में एक पिता ने दूसरी जाति में शादी करने से नाराज होकर जीवित बेटी का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार किया। इसके बाद पिंडदान, मुंडन और श्राद्ध भोज भी कराया गया।

father performs last rites of daughter

पिता ने बेटी का किया अंतिम संस्कार, Photo Credit- Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

बिहार के पूर्णिया जिले में एक पिता ने अपनी जीवित बेटी का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार कर दिया। इतना ही नहीं पंडितों को बुलाकर पिंडदान और मुंडन भी कराया गया। इसके बाद ग्रामीणों और रिश्तेदारों के लिए श्राद्ध भोज का आयोजन भी किया गया। यह मामला केनगर प्रखंड की गंगेली पंचायत के चपय गांव का है। बताया जा रहा है कि बेटी ने दूसरी जाति के युवक से प्रेम विवाह किया था जिससे उसका परिवार नाराज था। घटना के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा हो रही है।

 

बताया जा रहा है कि चपय गांव की रहने वाली युवती ने गांव के ही दूसरी जाति के युवक से प्रेम विवाह कर लिया था। युवती का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। परिजनों ने उसे समझाने की कई बार कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी। इसके बाद वह घर छोड़कर अपने प्रेमी के साथ चली गई। युवती के घर छोड़ने के बाद परिवार ने इसे अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ लिया। पिता ने गांव के लोगों के सामने कहा कि उनकी बेटी अब उनके लिए मर चुकी है। इसके बाद पिता ने अपनी जीवित बेटी का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।

 

यह भी पढ़ें: गयाजी में पितृपक्ष से पहले ऑनलाइन पिंडदान पर बवाल, पंडा समाज ने खोला मोर्चा

बेटी का पुतला बनाकर जलाया

पिता ने अपनी जीवित बेटी का पुतला बनवाया। इसके बाद उसे गांव के श्मशान घाट ले जाकर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पुतले को मुखाग्नि दी गई। इस दौरान परिवार के लोग भी मौजूद थे। गांव के लोगों ने जब यह देखा तो वे हैरान रह गए। अंतिम संस्कार के बाद पंडितों को बुलाया गया और पिंडदान कराया गया। पिता और परिवार के दूसरे पुरुष सदस्यों ने मुंडन भी कराया। इसके बाद गांव के लोगों और रिश्तेदारों के लिए श्राद्ध भोज का आयोजन किया गया।

परिजनों का कहना है कि बेटी ने परिवार की इज्जत को ठेस पहुंचाई है। दूसरी जाति में शादी करने के कारण उन्होंने उसे अपने लिए मरा हुआ मान लिया है। उनका कहना है कि जो बेटी परिवार की बात नहीं माने और समाज की प्रतिष्ठा का ध्यान न रखे वह उनके लिए जीवित नहीं है। इसी वजह से उसका श्राद्ध करने का फैसला लिया गया। गांव के कुछ लोगों ने पिता के इस फैसले का समर्थन किया जबकि कई लोगों ने इसे गलत बताया। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी किसी जीवित व्यक्ति का पिंडदान और श्राद्ध होते नहीं देखा।

 

यह भी पढ़ें: 'शंकराचार्य जाति से बने, आरक्षण आर्थिक आधार पर क्यों चाहिए?' आनंद मोहन का सवाल

घटना को लेकर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर जाति और परिवार की प्रतिष्ठा को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। बेटी के दूसरी जाति में शादी करने के बाद परिवार ने उससे रिश्ता खत्म करने जैसा फैसला लिया। हालांकि इस घटना को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग राय सामने आ रही है। पूर्णिया की यह घटना उन मामलों से अलग है जिनमें प्रेम विवाह को लेकर लोगों को शारीरिक नुकसान पहुंचाया जाता है। 

 

हालांकि परिवार की ओर से जीवित बेटी का अंतिम संस्कार और श्राद्ध किए जाने को लेकर सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। इस पूरे मामले में अभी तक पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। परिवार की ओर से भी घटना को लेकर अपनी बात रखी गई है।


और पढ़ें