बिहार में पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल में गुरुवार को
CBI
की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। टीम ने DRM कार्यालय में तैनात सहायक कार्मिक अधिकारी यानी APO को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद APO के सरकारी आवास की तलाशी में गैर लाइसेंसी पिस्टल, 2 मैगजीन और 9 कारतूस भी बरामद हुए हैं। CBI की इस कार्रवाई के बाद पूरे रेल मंडल में हलचल मच गई।
रिश्वत लेने के मामले के साथ अधिकारी के पास से अवैध हथियार मिलने से रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी भी हैरान हैं। CBI ने यह कार्रवाई DRM कार्यालय में तैनात डीलिंग क्लर्क अमृत राज की शिकायत पर की थी।
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ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े काम के लिए रिश्वत
डीलिंग क्लर्क अमृत राज की शिकायत के बाद CBI ने कार्रवाई की। आरोप था था कि APO अरुण कुमार मंडल ने ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े काम के लिए एक लाख रुपये की मांग की है। शिकायत मिलने के बाद CBI ने इस मामले की जांच शुरू की। गुरुवार को टीम ने जाल बिछाकर 50 हजार रुपये की पहली किस्त लेते समय अरुण कुमार मंडल को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद अरुण कुमार को हिरासत में लेकर कई घंटे तक पूछताछ की गई।
सरकारी आवास से पिस्टल और कारतूस बरामद
हैरानी तब हुई, जब पूछताछ के बाद CBI टीम अरुण को उनके सरकारी आवास ले गई। जहां तलाशी के दौरान एक गैर लाइसेंसी पिस्टल, 2 मैगजीन और 9 कारतूस बरामद किए गए। हथियार मिलने के बाद CBI अधिकारी सुनील कुमार सिंह के आवेदन पर समस्तीपुर नगर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। इसके अलावा, पुलिस ने हथियार और कारतूस को जब्त कर लिया है।
इसके अलावा, तलाशी के दौरान CBI ने ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े कई दस्तावेज भी खंगाले। आवास पर मंडल की पत्नी और बेटी से भी पूछताछ की गई। दोनों को ललित कला केंद्र स्थित अधिकारी क्लब लाया गया, जहां पूछताछ और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।
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अधिकारी क्लब में भी हुई पूछताछ
बाद में CBI की एक टीम ललित कला केंद्र स्थित अधिकारी क्लब भी पहुंची। वहां कई रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। साथ ही टीम ने ट्रांसफर, पोस्टिंग, प्रमोशन और दूसरी फाइलों की भी जांच शुरू कर दी है। सीबीआई का मानना है कि रिश्वत का यह मामला अकेले नहीं हो सकता। ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर और भी लेन-देन की आशंका जताई जा रही है। इसी को लेकर दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
एपीओ की गिरफ्तारी के बाद समस्तीपुर रेल मंडल में चर्चा का माहौल है। कई कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए पैसे मांगने की शिकायतें सुनने को मिलती थीं, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आता था। इस मामले पर पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि CBI की आधिकारिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही रेलवे कोई बयान देगा। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करता है।
एसपी ने की इस मामले की पुष्टि, जांच जारी
समस्तीपुर के एसपी अरविंद प्रताप सिंह के मुताबिक, CBI की सूचना पर आरोपी के घर से पिस्टल, 9 कारतूस और 2 मैगजीन बरामद किए गए हैं। हथियार लाइसेंसी नहीं है। इस मामले में आर्म्स एक्ट के तहत अलग से FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि यह हथियार कहां से आया और इसका इस्तेमाल किस लिए किया जाना था। सीबीआई रिश्वत मामले के साथ-साथ हथियार बरामदगी की भी जांच कर रही है।
टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अधिकारी ने ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए दबाव बनाने के लिए हथियार का इस्तेमाल किया था या फिर इसे किसी और मकसद से रखा गया था। CBI अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में रिश्वत के पुख्ता सबूत मिले हैं। अब आगे की जांच में यह भी देखा जाएगा कि इस पूरे रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की तैयारी
रेलवे में भ्रष्टाचार को लेकर CBI की यह कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है। पिछले कुछ समय से शिकायतें आ रही थीं कि समस्तीपुर मंडल में ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर पैसे मांगे जा रहे हैं। इसी को देखते हुए सीबीआई ने कार्रवाई की। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस गिरफ्तारी के बाद अब अन्य अधिकारी भी सतर्क हो जाएंगे। भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।