बिहार के सुपौल जिला परिवहन कार्यालय में निगरानी विभाग ने कार्रवाई करते हुए डाटा एंट्री ऑपरेटर नंदलाल कुमार को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। निगरानी की टीम ने उसे उसके कार्यालय कक्ष में ही घूस लेते पकड़ा। कार्रवाई के बाद पूरे कार्यालय में हड़कंप मच गया। आरोपी को अब भागलपुर स्थित निगरानी के विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा।
निगरानी विभाग के पुलिस उपाधीक्षक विंध्याचल प्रसाद ने बताया कि ललितग्राम थाना क्षेत्र के मधुबनी गांव निवासी मो. अजहर अली ने विभाग में शिकायत की थी कि DTO ऑफिस में उनसे रिश्वत मांगी जा रही है। उन्होंने महाराष्ट्र से वैगनआर कार खरीदी थी और गाड़ी के लिए बिहार का नंबर लेने के लिए सुपौल जिला परिवहन कार्यालय में आवेदन किया था। इसी काम के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर उनसे 15 हजार रुपये रिश्वत मांग रहा था।
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महाराष्ट्र से खरीदी थी वैगनआर
जानकारी के अनुसार मधुबनी निवासी अजहर अली ने कुछ महीने पहले महाराष्ट्र से एक वैगनआर कार खरीदी थी। महाराष्ट्र की गाड़ी का बिहार में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए उन्होंने सुपौल जिला परिवहन कार्यालय में आवेदन दिया था। नियमानुसार दस्तावेज जमा करने के बाद उनका काम हो जाना चाहिए था लेकिन ऑपरेटर काम को टाल रहा था।
पीड़ित का आरोप है कि नंदलाल ने उनसे कहा कि बिहार नंबर कराने के लिए 15 हजार रुपये लगेंगे। बिना पैसे दिए काम नहीं होगा। पीड़ित ने कई बार मिन्नत की लेकिन ऑपरेटर नहीं माना। वह रिश्वत नहीं देना चाहते थे इसलिए उन्होंने पटना स्थित निगरानी एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में लिखित शिकायत कर दी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का सत्यापन कराया। गुप्त जांच में पता चला कि ऑपरेटर रिश्वत मांग रहा था। इसके बाद निगरानी विभाग ने ट्रैप की योजना बनाई और वरीय अधिकारियों की अनुमति लेकर धावा दल का गठन किया।
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15 हजार लेते रंगेहाथ पकड़ा
निगरानी विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार, कांड के अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक राजेश कुमार के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में धावा दल गठित किया गया। टीम में निगरानी एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, पटना के कई अधिकारी शामिल थे। पीड़ित अजहर को 15 हजार रुपये के केमिकल लगे नोट देकर DTO कार्यालय भेजा गया। जैसे ही पीड़ित ने ऑपरेटर को उसके कार्यालय कक्ष में 15 हजार रुपये दिए पहले से घात लगाए निगरानी की टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। नोटों पर लगा केमिकल उसके हाथों पर लग गया जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।
गिरफ्तारी के बाद कार्यालय में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी अपना टेबल छोड़कर बाहर निकल गए। कुछ देर के लिए कार्यालय का कामकाज भी प्रभावित हुआ। लोग एक-दूसरे से पूछने लगे कि क्या हुआ। जब पता चला कि निगरानी ने रिश्वत लेते ऑपरेटर को पकड़ा है तो लोगों ने राहत की सांस ली। DSP ने बताया कि तत्काल कार्रवाई में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने नहीं आई है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। उसके पास से रिश्वत के 15 हजार रुपये बरामद कर लिए गए हैं। पूछताछ के बाद आरोपी को भागलपुर स्थित निगरानी के विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा और जेल भेजा जाएगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद सुपौल DTO ऑफिस में भ्रष्टाचार की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला परिवहन कार्यालय में बिना पैसे के कोई काम नहीं होता। लाइसेंस बनवाने से लेकर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन, फिटनेस और परमिट तक हर काम के लिए दलाल सक्रिय हैं और मोटी रकम वसूली जाती है।