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बच्चों को गाड़ी दी तो मां-बाप भी नपेंगे, बिहार में ट्रैफिक नियम होंगे सख्त

अगर बिहार में कोई भी नाबालिग लड़का या लड़की गाड़ी चलाता पकड़ा गया तो अब उसके पैरेंट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जून में खास अभियान भी चलाया जाने वाला है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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बिहार में अब कम उम्र में बाइक, स्कूटी या कार चलाना सिर्फ ट्रैफिक नियम तोड़ना नहीं, बल्कि सीधे कानूनी कार्रवाई को न्योता देना होगा। राज्य परिवहन विभाग ने नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ जून महीने से पूरे बिहार में बड़ा अभियान चलाने का फैसला किया है। इस बार कार्रवाई केवल बच्चों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वाहन देने वाले अभिभावकों को भी कानून के घेरे में लाया जाएगा।

 

परिवहन विभाग ने सभी जिलों के डीटीओ को विशेष निर्देश जारी करते हुए स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, मॉल, मुख्य बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सघन जांच अभियान चलाने को कहा है। इसके लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया जा रहा है, जो सड़कों पर चलने वाले कम उम्र के बाइक और कार चालकों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई करेंगी।

बच्चों का स्टाइल अब बन सकता है मुसीबत

राजधानी पटना समेत कई शहरों में कम उम्र के बच्चों द्वारा तेज रफ्तार बाइक चलाने, स्टंट करने और बिना हेलमेट सड़कों पर दौड़ लगाने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। अक्सर स्कूली छात्र महंगी स्पोर्ट्स बाइक और कार लेकर सड़कों पर नजर आते हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ ट्रैफिक उल्लंघन नहीं, बल्कि जानलेवा लापरवाही है।

 

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इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क हादसों में बड़ी संख्या युवाओं और किशोरों की सामने आ रही है। कम उम्र में वाहन चलाने वाले बच्चे ट्रैफिक नियमों की गंभीरता को समझ नहीं पाते, जिसका नतीजा दुर्घटनाओं के रूप में सामने आता है।

मां-बाप पर भी कसेगा कानून का शिकंजा

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब सिर्फ नाबालिग चालक ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावक भी सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे। अगर कोई नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा गया तो उसके माता-पिता या वाहन मालिक पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही तीन महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान रखा गया है। परिवहन विभाग का साफ कहना है कि कई मामलों में अभिभावक खुद बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति देते हैं। ऐसे में हादसा होने पर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। विभाग ने इसे सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है।

 

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बिना हेलमेट, बिना लाइसेंस वालों पर भी शिकंजा

विशेष अभियान के दौरान सिर्फ नाबालिग चालकों की ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। बिना हेलमेट बाइक चलाने, सीट बेल्ट नहीं लगाने, बिना लाइसेंस वाहन चलाने और ओवरस्पीडिंग करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नए मोटर वाहन कानून के तहत जुर्माने की राशि पहले की तुलना में काफी बढ़ाई गई है, ताकि लोग नियमों को गंभीरता से लें। सरकार का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

संदेश साफ सुरक्षा से समझौता नहीं

राज्य सरकार इस अभियान के जरिए यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि सड़क पर लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। परिवहन विभाग का मानना है कि अगर अभिभावक सतर्क रहें और बच्चों को कम उम्र में वाहन न दें, तो बड़ी संख्या में सड़क हादसों को रोका जा सकता है।

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