केरल हाई कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसले में साफ कहा कि चुने गए जनप्रतिनिधियों को शपथ सिर्फ कानून में तय किए गए शब्दों और तरीके से ही लेनी होगी। अदालत ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के कुछ BJP पार्षदों की शपथ को भी गलत और अमान्य घोषित कर दिया। इन पार्षदों ने शपथ लेते समय 'भारत माता', देवी-देवताओं और दूसरे नामों का भी जिक्र किया था, जो नियमों के मुताबिक नहीं माना गया।
न्यायमूर्ति पी वी कुन्हीकृष्णन की पीठ ने कहा कि केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट और केरल पंचायत राज एक्ट के मुताबिक शपथ सिर्फ 'ईश्वर के नाम पर' या 'सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा' के रूप में ही ली जा सकती है। कोर्ट ने साफ किया कि तय किए गए शब्दों में किसी भी तरह का बदलाव, जोड़ या बढ़ोतरी करना कानून के खिलाफ होगा।
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20 पार्षदों की शपथ पर उठे सवाल
यह मामला तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 BJP पार्षदों से जुड़ा था। आरोप था कि इन पार्षदों ने शपथ लेते समय 'भारत माता', 'भारथाम्बा', अलग-अलग देवी-देवताओं, गुरुदेव और राजनीतिक आंदोलन से जुड़े शहीदों के नामों का उल्लेख किया था। इसी आधार पर शपथ प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी गई थी।
एक अन्य मामले में पलक्कड़ जिले के वडक्केंचेरी ग्राम पंचायत के एक सदस्य ने शपथ लेते समय 'ओमन चांडी के नाम पर ईश्वर की कृपा से' वाक्य जोड़ा था। अदालत ने कहा कि शपथ एक गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधि संविधान और कानून के प्रति निष्ठा की प्रतिज्ञा लेते हैं।
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कोर्ट का साफ संदेश: कानून से छेड़छाड़ नहीं चलेगी
अदालत ने कहा कि जब शपथ का तरीका कानून में स्पष्ट रूप से तय है तो उसमें किसी भी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इन पार्षदों की चुनावी जीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि जनता का जनादेश वैध है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर सभी प्रभावित प्रतिनिधियों को कानून के अनुसार दोबारा शपथ दिलाई जाए, और इसे एक गलती मानते हुए किसी प्रकार की सजा नहीं दी जाएगी।