बीजेपी नेता युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के 56वें मुख्यमंत्री बने। उन्होंने बुधवार की शाम लोक भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित पार्टी नेताओं की बैठक में वाई खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को ही मणिपुर से राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से हटा लिया है। 13 फरवरी 2025 से यहां राष्ट्रपति शासन लागू था। 9 फरवरी को तत्कालीन सीएम एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। 3 मई 2023 को मणिपुर में कुकी और मैतेई जनजातियों के भड़की हिंसा के करीब डेढ़ साल बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया था।
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मणिपुर हिंसा में अब तक 260 लोगों की जान गई। 1000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। 3000 से अधिक हथियारों को जब्त किया गया है। मणिपुर में फिलहाल शांति है, लेकिन नए सीएम वाई खेमचंद के सामने तमाम चुनौतियां हैं। जिनसे पिछले मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पार पाने में सफल नहीं हो सके थे।
बीजेपी किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष खवुंगसिंग शिमराय का कहना है कि हम केंद्र सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने मणिपुर के लोगों खासकर विधायकों के लिए यह पहल की है। हम बहुत खुश हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हालात चाहे जैसे भी हों, हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र और राज्य मिलकर जमीन पर शांति लाएंगे।
एक साल तक लगा रहा राष्ट्रपति शासन
- पहली बार: 13 फरवरी 2025 को छह महीने
दूसरी बार: अगस्त 2025 में छह महीने और बढ़ाया गया।
नए सीएम के सामने कौन सी चुनौती
- मणिपुर के नए सीएम वाई खेमचंद सिंह बेहद अनुभवी हैं। वे कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। मगर उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के अंदर समन्वय बनाने की होगी, क्योंकि पिछले साल बीरेन सिंह को हटाने की मांग कई बार उठ चुकी थी।
- मणिपुर में हिंसा कुकी और मैतेई समुदाय के बीच फैली है। अब भी दोनों समुदायों में कड़वाहट कम नहीं हुई है। बीरेन सिंह की तरह मौजूदा सीएम खेमचंद सिंह भी मैतेई समुदाय से हैं। उनके सामने दूसरी बड़ी चुनौती दोनों समुदाय के बीच विश्वास को बहाल कराने की है।
- मणिपुर विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या 60 है। 2022 में बीजेपी ने 32 सीटों पर जीत हासिल की थी। जेडीयू के छह में से पांच विधायकों ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। इससे बीजेपी विधायकों की संख्या 37 हो गई। इनमें से सात विधायक कुकी समुदाय से आते हैं। पिछले साल 14 दिसंबर को पार्टी ने नई दिल्ली में एक बैठक बुलाई थी। जिसमें तीन कुकी विधायक नहीं पहुंचे थे। अब सीएम खेमचंद के सामने पार्टी में सबको साथ लेकर चलने की चुनौती है।
किस पार्टी से कितने विधायक?
- नेशनल पीपल्स पार्टी के छह विधायक
- नागा पीपल्स के पांच विधायक
- कांग्रेस के पांच विधायक
- दो विधायक कुकी पीपल्स अलायंस के
- तीन निर्दलीय विधायक
- एक जेडीयू का विधायक
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- हिंसा के कारण मणिपुर में अब भी 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हैं। सीएम के सामने इन लोगों को दोबारा उनके घरों तक पहुंचाने की चुनौती है। हालांकि पिछले साल 8 दिसंबर को खेमचंद सिंह ने उखरुल और कामजोंग जिलों में स्थित दो कुकी-जो गांवों का दौरा किया था। वह विश्वास बहाली में जुटे हैं।
- 3 फरवरी को नई दिल्ली में हुई बैठक में कुकी समुदाय के पांच विधायक पहुंचे। उन्होंने साफ कर दिया कि तब तक राजनीतिक समाधान का आश्वासन नहीं मिलेगा तब तक वह सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे। ऐसे में इन नाराज विधायकों को भी मनाने की एक बड़ी चुनौती है।