उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के इकलौते विधायक का नाम उमाशंकर सिंह है। बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह के घर बुधवार की सुबह इनकम टैक्स विभाग की टीम ने छापा मारा। इस कार्रवाई से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खलबली मची हुई है। अब उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता दिनेश प्रताप सिंह ने इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है कि प्रभु ऐसे लोगों और संस्थाओं को सद्बुद्धि दे। दिनेश प्रताप सिंह ने यह भी लिखा है कि उमाशंकर की तबीयत खराब है और दो साल से वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
बुधवार सुबह लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित उमाशंकर सिंह के घर पर इनकम टैक्स की टीम पहुंची। दर्जन भर अधिकारियों की टीम के साथ पुलिस के लोग भी मौजूद थे। इन लोगों ने उमाशंकर के घर मौजूद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की जांच की। इसके बारे में आयकर विभाग की ओर से कोई बयान नहीं जारी किया गया है और ना ही यह बताया गया है कि यह छापेमारी किस मामले में की गई है।
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उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाने वाले उमाशंकर सिंह मायावती के बेहद करीबियों में गिने जाते हैं। वह 2012 से लगातार रसड़ा से चुनाव जीत रहे हैं। उनके खिलाफ एक मामला साल 2013 का है। तब एडवोकेट सुभाष चंद्र सिंह ने लोकायुक्त में उमाशंकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि विधायक बनने के बावजूद उमाशंकर सिंह पीडब्ल्यूडी के ठेके ले रहे थे और सड़क निर्माण का काम कर रहे थे। इसी मामले में दोषी पाए जाने के बाद जनवरी 2015 में उनकी विधायकी चली गई। हालांकि, बाद में वह फिर से विधायक बने और 2022 में भी चुनाव जीते।
क्यों भड़के दिनेश प्रताप सिंह?
अब दिनेश प्रताप सिंह ने इस छापेमारी पर सवाल उठाते हुए लिखा है, 'उमाशंकर सिंह विधायक रसड़ा जनपद बलिया जिनके घर में मेरी बेटी ब्याही है के घर में आज आयकर विभाग के द्वारा रेड की जा रही है। देश प्रदेश के राजनेता आयकर सहित सभी संस्थाओं को पता है कि श्री उमाशंकर सिंह दो वर्ष से अधिक से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे है, वर्तमान परिस्थितियों में श्री उमाशंकर सिंह जी के लिए धनार्जन नहीं सांसें बचाने में ही सारा समय और धन व्यय हो रहा है। सभी व्यवसाय लगभग बंद हो गए है। आज अपने आवास में आइसोलेशन में रह रहे हैं। विधानसभा का सत्र एक विधायक के लिए महत्वपूर्ण होता है लेकिन एक घंटे के लिए भी नहीं जा सके।'
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उन्होंने आगे लिखा है, 'इस समय उनके घर पर नर्स या डॉक्टर को भी जाने की अनुमति नहीं है यदि उनके जीवन को कोई हानि होती हैं तो ये संवेदनहीन संस्थाएं जिम्मेदार होंगी। इस प्रकार की परिस्थितियों में दुर्लभतम अपराधों में भी माननीय न्यायालय दया के आधार पर याचिका स्वीकार कर दोष मुक्त कर देते हैं। इस कठिन दौर में भी कौन संवेदनहीन राजनेता या संस्था हो सकती हैं, जो ऐसी परिस्थितियों में भी पीड़ा देने की सोच सकता है, प्रभु ऐसे लोगों को और संस्थाओं को सद्बुद्धि दे।'