पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव इसी साल होने हैं। तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूरी तरह से चुनावी मोड में हैं। वह अपना हर कदम सोच समझकर और ऐसी दिशा में उठा रही हैं कि चुनावी समीकरण सही बैठे। इसी क्रम में उन्होंने अपनी विरोधी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक मौजूदा सांसद को राज्य के सर्वोच्च सम्मान 'बंग विभूषण' से सम्मानित किया है। इस फैसले से बीजेपी परेशान है लेकिन ममता बनर्जी और TMC मुस्कुरा रही हैं।
हाल ही में अंतर राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर पश्चिम बंगाल सरकार के एक कार्यक्रम में अनंत महाराज मंच पर ममता बनर्जी के साथ बैठे नजर आए। अनंत महाराज समेत कुल 9 हस्तियों को बंग विभूषण और 16 हस्तियों को बंग भूषण से सम्मानित किया गया। हालांकि, 25 नामों में से सबसे ज्यादा चर्चा अनंत महाराज की हो रही है क्योंकि एक समय पर खुद TMC ने ही उनका विरोध किया था।
बदल गए अनंत महाराज के सुर?
ममता बनर्जी के इसी मंच से अनंत महाराज ने बीजेपी और बीजेपी की केंद्र सरकार पर निशाना भी साधा। अनंत महाराज ने आरोप लगाए कि बीजेपी ने उत्तर बंगाल के लोगों, कोच और राजबंशी समुदाय के लोगों के लिए कोई काम नहीं किया। वह आरोप लगा रहे हैं कि बीजेपी ने बंगाल को वंचित किया है और इसकी कोई सीमा नहीं है।
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उनके ऐसे बयानों और ममता बनर्जी के साथ मंच पर बैठने के चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि अब वह पाला बदलने का प्लान बना चुके हैं। दूसरी तरफ ममता बनर्जी की कोशिश भी है कि वह राजबंशी समुदाय को अपने साथ जोड़ सकें और इस इलाके में खुद को मजबूत कर सकें।
इतने अहम क्यों हैं अनंत?
2011 की जनगणना के आंकड़ों को देखें तो उत्तर बंगाल में राजबंशियों की आबादी लगभग 30 प्रतिशत है। राजबंशी कितने अहम हैं इसका असर साल 2019 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिला था। तब अनंत महाराज ने बीजेपी का समर्थन किया था और बीजेपी इस इलाके की 8 में से सात लोकसभा सीटों पर चुनाव जीत गई थी।
बंगाल के अलावा असम में भी इस समुदाय के लिए लोग अच्छी खासी संखअया में हैं। जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग, मालदा और मुर्शिदाबाद में भी राजबंशियों की संख्या काफी अच्छी है। बीजेपी लगातार टीएमसी को तोड़ने की कोशिश कर रही है और अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश में है। ऐसे में ममता बनर्जी का यह दांव बेहद अहम माना जा रहा है।
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कौन हैं अनंत महाराज?
जुलाई 2023 में बीजेपी के राज्यसभा सांसद चुने गए अनंत महाराज पश्चिम बंगाल के कूचबिहार इलाके से आते हैं। एक समय पर वह अलग राज्य की मांग भी कर चुके हैं। राजबंशी समुदाय से आने वाले अनंत महाराज अपने समुदाय के प्रमुख नेता हैं। रोचक बात है कि 2023 में जब बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में उतारा था तब टीएमसी ने आरोप लगाए थे कि बीजेपी बंगाल के विभाजन को उकसावा दे रही है।
इसकी वजह यह थी कि दो दशक पहले अनंत महाराज खुद को कूचबिहार का स्वयंभू राजा भी घोषित कर चुके हैं। पिछले कई चुनावों से वह बीजेपी का समर्थन भी करते आ रहे हैं। उनकी पार्टी ग्रेटर कूचबिहार पीपल्स असोसिएशन (GCPA) भी एनडीए का हिस्सा रही है।