logo

मूड

ट्रेंडिंग:

जेल से बाहर आएगा शरद कलास्कर, नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में मिली जमानत

नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में आजीवान कारावास की सजा पाने वाले शरद कलास्कर को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। माना जा रहा है कि वह जल्द ही जेल से बाहर आ सकता है।

Narendra Dabholkar

नरेंद्र दाभोलकर। (Photo Credit: PTI)

शेयर करें

google_follow_us

नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट से शरद कलास्कर को जमानत मिल गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में शामिल जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस आरआर भोसले की पीठ ने शरद कलास्कर की याचिका पर सुनवाई की। पुणे की अदालत ने शरद कलास्कर को नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले में दोषी ठहराया था। उसे आजीवन करावास की सजा सुनाई गई थी। अब शरद ने पुणे कोर्ट के फैसले को चुनौती दी और अपनी अपील पर फैसला आने तक जमानत देने का अनुरोध किया था। अदालत ने 50 हजार रुपये की जमानत राशि पर बेल दी है।

 

शरद कलास्कर के खिलाफ कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे की हत्या का भी मामला चल रहा है। हालांकि हाई कोर्ट से पिछले साल इस मामले में जमानत मिल चुकी है। अब दाभोलकर मामले में जमानत मिलने के बाद शरद कलास्कर किसी भी वक्त जेल से बाहर आ सकता है। हालांकि अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से अपने आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया, मगर अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया।

 

 

 

 

यह भी पढ़ें: फर्जी IAS बनकर 3 बहनों ने ठगे 11 लाख रुपये, बरेली पुलिस ने किया गिरफ्तार

क्या है नरेंद्र दाभोलकर केस?

20 अगस्त 2013 को पुणे में नरेंद्र दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह सुबह सैर पर निकले थे। तभी बाइक सवार दो लोगों ने वारदात को अंजाम दिया था। दाभोलकर पुणे में अंधविश्वास के खिलाफ 'महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति' नाम से संस्था चलाते थे। मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस ने की। बाद में मृतक की बेटी मुक्ता दाभोलकर ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई। 

 

यह भी पढ़ें: 'जमानत रद्द होगी', भगवंत मान को कोर्ट ने लगाई फटकार; 1 मई को पेश होने का आदेश

इन्हें अदालत ने कर दिया था बरी

पुणे की एक सत्र न्यायालय ने 10 मई 2024 को सचिन अंदुरे और शरद कलास्कर को हत्या का दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं वीरेंद्र सिंह तावड़े, विक्रम भावे और संजीव पुनालेकर को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया। नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के बाद तीन अन्य तर्कवादी व सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्या भी हुई। फरवरी 2015 में कोल्हापुर में गोविंद पानसरे, अगस्त 2015 में धारवाड़ में कन्नड़ भाषा के विद्वान एमएम कलबुर्गी और सितंबर 2017 में बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या हुई थी। 

Related Topic:#maharastra news

और पढ़ें