उत्तर प्रदेश के सीतापुर से सामने आई एक शिक्षिका की कहानी मुश्किल हालात में हौसले की मिसाल बन गई है। कैंसर की चौथी अवस्था, लगातार कीमोथेरेपी और आंखों में मोतियाबिंद जैसी परेशानियों के बावजूद कंपोजिट विद्यालय सराय मल्ही की शिक्षिका कविता दीक्षित ने हार नहीं मानी। बीमारी के इलाज के साथ पढ़ाई जारी रखी और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास कर अपने मजबूत इरादों का परिचय दिया।
कविता पिछले करीब तीन वर्षों से कैंसर से जंग लड़ रही हैं। इस दौरान उन्हें 100 से अधिक बार कीमोथेरेपी के कठिन दौर से गुजरना पड़ा। इलाज के भारी डोज का असर उनकी आंखों पर भी पड़ा और दोनों आंखों में मोतियाबिंद की समस्या हो गई। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई और शिक्षण कार्य को रुकने नहीं दिया। कविता ने बीमारी को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय उसे चुनौती के तौर पर लिया। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ वह घर की जिम्मेदारियां भी निभाती रहीं और परीक्षा की तैयारी के लिए देर रात तक पढ़ाई करती रहीं।
यह भी पढ़ें: कौशांबी की पटाखा फैक्टरी में आग क्यों लगी? 9 की मौत, 15 मकान ढहे
कीमोथेरेपी के सफर में भी किताबें बनीं साथी
शिक्षिका के मुताबिक जब भी उन्हें इलाज के लिए दिल्ली जाना पड़ता था, वह अपनी किताबें साथ लेकर जाती थीं। ट्रेन के सफर से लेकर अस्पताल में इलाज के बीच मिलने वाले समय तक उन्होंने पढ़ाई को प्राथमिकता दी। मुश्किल परिस्थितियों में भी तैयारी जारी रखी और आखिरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफलता हासिल की। कविता का कहना है कि परीक्षा की तैयारी उनके लिए आसान नहीं थी, लेकिन लक्ष्य साफ था। बीमारी और इलाज के बीच उन्होंने अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
कविता मानती हैं कि दुनिया में हर मुश्किल का कोई न कोई हल जरूर होता है। उनके सामने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी थी, लेकिन उन्होंने इसे अपने हौसले पर हावी नहीं होने दिया। उनका कहना है कि जब बीमारी उनका हौसला नहीं तोड़ सकी तो परीक्षा उनके लिए उससे बड़ी चुनौती नहीं थी। चुनौतियों से भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए, क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। कविता के संघर्ष और सफलता की शिक्षा विभाग में भी सराहना हुई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने शिक्षिका के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उनके जज्बे को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने जल्द विद्यालय पहुंचकर कविता को बधाई देने की बात कही।
यह भी पढ़ें: 2027 के लिए क्या एजेंडा तय कर गईं मायावती? बैठक में बन गई रणनीति
सफलता ने दिया बड़ा संदेश
कविता दीक्षित की कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है। यह उन लोगों के लिए संदेश है जो मुश्किल परिस्थितियों के सामने अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं। गंभीर बीमारी के इलाज के बीच पढ़ाई जारी रखना, विद्यालय में बच्चों को पढ़ाना और फिर परीक्षा में सफलता हासिल करना उनके मजबूत इरादे को दिखाता है।कविता ने साबित कर दिया कि हालात कितने भी कठिन हों, अगर लक्ष्य के प्रति जिद और हौसला कायम रहे तो मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी पार किया जा सकता है।