logo

मूड

ट्रेंडिंग:

चंडीगढ़ क्रेस्ट स्कैम में IFS का नाम, पैसे का बड़ा खेल, क्या खुलासा हुआ?

चंडीगढ़ के क्रेस्ट स्कैम का मुद्दा सुर्खियों में क्यों है, कौन से बड़े नाम रडार पर हैं, अब क्या खुलासा है, पढ़ें हर सवाल का जवाब।

Chandigrah News

तस्वीर प्रतीकात्मक है। AI जनरेटेड इमेज। Photo Credit: Sora

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

चंडीगढ़ क्रेस्ट स्कैम में एक नया खुलासा हुआ है। स्कैम में गिरफ्तार प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल ने पूछताछ में एक IFS अधिकारी का नाम लिया है। उन्होंने अपने बयान में दावा किया है कि घोटाले की पूरी जानकारी अधिकारी को दी। उन्होंने आरोप लगाया है कि अधिकारी के ही इशारे पर टैक्सी के जरिए गाजियाबाद करीब 50 लाख की रकम भेजी गई है।

पुलिस अब टैक्सी ड्राइवर से पूछताछ के बाद IFS अधिकारी से पूछताछ करेगी। स्मार्ट सिटी के 117 करोड़ के फर्जी FD घोटाले में अबरोल और चीफ फाइनेंस ऑफिसर नलिनी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पूर्व चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा के खिलाफ अभी कोई सबूत नहीं मिला है।  

कितने करोड़ का है घोटाला?

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ क्रेस्ट स्कैम को चंडीगढ़ का सबसे बड़ा बैंक घोटाला बताया जा रहा है। म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन चंडीगढ़ (MCC) और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) के फंड्स में IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 ब्रांच से करीब 117 करोड़ रुपये का कथित फ्रॉड हुआ है। अभी यह सिर्फ शुरुआती आंकड़ा है। असल नुकसान कितना हुआ, यह CAG की स्पेशल ऑडिट और सभी अकाउंट्स की पूरी जांच के बाद ही पता चलेगा।

क्या है यह मामला?

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च-अप्रैल 2025 में यह घोटाला प्रकाश में आया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के बंद होने के बाद ऐसी खबरें आईं। उस समय बैंक के ब्रांच मैनेजर ऋषभ ऋषि ने 11 फेक फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDRs) जारी कीं, जिनकी कुल राशि 116.84 करोड़ रुपये थी। इन जाली FDRs को CSCL के रिकॉर्ड्स में दिखाया गया, लेकिन असल में बैंक के सिस्टम में ये कहीं थे ही नहीं। 

जब नगर निगम ने यह एफडी भुनाने की कोशिश की तो बैंक ने बताया कि ये फर्जी हैं। घोटाला तब उजागर हुआ जब फरवरी 2026 में हरियाणा में IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े बड़े फ्रॉड की खबरें अखबारों में छपीं। नगर निगिम अधिकारियों ने तुरंत बैंक से संपर्क किया और अपना पैसा मांगा। 

बैंक ने 25 फरवरी को नगर निगम के पंजाब नेशनल बैंक अकाउंट में 121.14 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन MC ने साफ कहा कि यह अंतिम भुगतान नहीं माना जाएगा। बाकी बचे पैसे, ब्याज और गलत तरीके से निकाले गए पैसे की भी वसूली की जाएगी।

 

यह भी पढ़ें: 'हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र की तरह ही...', ममता बनर्जी ने CEC को लिखी चिट्ठी

अब आगे क्या?

नगर निगम ने इस मामले की पूरी जांच के लिए कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) से स्पेशल ऑडिट मांगा है। एक विभागीय समिति ने 13 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें सभी अकाउंट्स का मिलान चल रहा है। गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने सभी खातों पूरी जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि हर एक रुपया वसूला जाएगा और चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी हो, सबको सजा मिलेगी।

अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

सबसे बड़ी गिरफ्तारी पूर्व CSCL CFO नलिनी मलिक की हुई है। 6 अप्रैल को कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस का आरोप है कि नलिनी मलिक ने आउटसोर्स अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर ये जाली FD रसीदें बनाईं। नलिनी मलिक की गिरफ्तारी के बाद पूर्व CGM एनपी शर्मा भी जांच में शामिल हो गए हैं।

पुलिस ने 9 मार्च को इकोनॉमिक ऑफेंसेज पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगाई गई हैं। नगर निगम ने एक अकाउंटेंट और एक सुपरिंटेंडेंट को सस्पेंड कर दिया है और फाइनेंस सेक्शन ऑफिसर के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है।

यह भी पढ़ें: हरियाणा बैंक घोटाला मामले में CBI जांच की सिफारिश, रडार पर आ सकते हैं कई IAS 

कैसे आपस में जुटे हैं घोटाले?

पंचकुला नगर निगम में भी कोटक महिंद्रा बैंक में 150 करोड़ से ज्यादा का मिसमैच पाया गया है। सभी घोटालों में तरीका एक है। फर्जी एफडी, फर्जी बैंक स्टेटमेंट, शेल कंपनियां, बैंक के अंदरूनी लोगों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत की बात एक जैसी है।

अब आगे क्या?

नगर निगम बुधवार को हाउस मीटिंग करने वाला है। सभी जानकारी पार्षदों को दी जाएगी। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इससे जुड़े और पक्षों को तलाश रहीं हैं। 

Related Topic:#Chandigarh

और पढ़ें