logo

मूड

ट्रेंडिंग:

चारधाम हेलीकॉप्टर सेवा पर ब्रेक, नए नियम से कंपनियों के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?

उत्तराखंड के जोशीमठ में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद DGCA ने 2 पायलट का सख्त नियम लागू किया है। कंपनियां इसका विरोध कर रही हैं। नए नियम से कंपनियों के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?

हेलीकॉप्टर क्रैश, Char Dham Helicopter Service, DGCA Two Pilot Rule,

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-ChatGPT

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

उत्तराखंड के जोशीमठ में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 2 पायलट का सख्त नियम लागू किया है। DGCA ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त करते हुए चार धाम चार्टर उड़ानों के लिए दो पायलटों की तैनाती जरूरी कर दी है। नए नियम को लेकर हेलीकॉप्टर सेवा देने वाली कंपनियों के एक संगठन ने सोमवार से चारधाम की चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है। कंपनियां हर उड़ान में दो पायलट रखना अनिवार्य करने के नए नियम का विरोध कर रही हैं।  

 

इस नियम के आने के बाद, 31 अक्टूबर को 11 हेलीकॉप्टर कंपनियों ने DGCA को एक पत्र लिखा है। कंपनियों का कहना है कि हर उड़ान में दो पायलट रखना अनिवार्य होने से उनका खर्च काफी बढ़ जाएगा। इससे उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा जारी रखना आर्थिक रूप से मुश्किल होगा। अब हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने DGCA को पत्र लिखकर इस शर्त को हटाने की मांग की है।हेलीकॉप्टर सेवा देने वाली कंपनियों ने सोमवार से चार्टर सेवाएं बंद कर दी हैं। 

 

यह भी पढ़ें: हेलीकॉप्टर क्रैश: उत्तराखंड में क्यों नहीं थम रहे हादसे, कहां हो रही है चूक? 

क्या है पूरा विवाद? 

शनिवार को चारधाम यात्रा मार्ग पर उड़ान भरने वाले सभी हेलीकॉप्टरों में दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया गया। यह फैसला जोशीमठ में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद लिया गया। इस हादसे में कर्नाटक के पांच श्रद्धालुओं और एक पायलट समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद आए नए फैसले पर कंपनियों विरोध कर रही हैं।

 

कंपनियों ने हर हेलीकॉप्टर में सह-पायलट यानी दूसरे पायलट को अनिवार्य करने के फैसले का विरोध किया है और 2 नवंबर से सेवाएं बंद कर दीं। इससे चारधाम यात्रा के आखिरी दिनों में श्रद्धालुओं को परेशानी भी बढ़ी है। हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने रविवार को नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को पत्र लिखकर कहा था कि अगर दो पायलट रखने का नियम वापस नहीं लिया गया तो वे 2 नवंबर से अपनी सेवाएं बंद कर देंगे। 

आंकड़े क्या बताते हैं?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, चारधाम यात्रा 2026 के पहले चरण में अप्रैल से 26 जून तक रोजाना करीब 400 हेलीकॉप्टर उड़ानें हुईं। इस दौरान 12032 शटल उड़ानों से 67064 श्रद्धालुओं ने यात्रा की। इसके अलावा, 2065 चार्टर्ड उड़ानों से 11715 यात्रियों को पहुंचाया गया। कुल मिलाकर देखा जाए तो शटल और चार्टर्ड उड़ानों के जरिए कुल 78,779 यात्रियों ने सफर किया।

 

ये आंकड़े बताते हैं कि चारधाम में हेलीकॉप्टर सेवा का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में हर दिन सैकड़ों उड़ानों के बीच मौसम, पायलटों की थकान, यात्रियों की संख्या और हेलीकॉप्टरों के बीच सुरक्षित दूरी का ध्यान रखना जरूरी है। 

DGCA का आदेश

शनिवार को हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के साथ एक जरूरी बैठक के बाद, रेगुलेटर ने लिखित निर्देश जारी किए। इन निर्देशों के तहत, चार धाम की सभी चार्टर उड़ानों में दो पायलटों का होना अनिवार्य कर दिया गया है, और को-पायलट के पास पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने की योग्यता (हिल-क्वालिफाइड) होना भी जरूरी है।

 

DGCA ने यह भी निर्देश दिया है कि हर सेक्टर के लिए उड़ान भरने से पहले, क्रू को सहस्रधारा कंट्रोल रूम से डेस्टिनेशन और रास्ते यानी एन-रूट के लिए क्लीयरेंस लेनी होगी। शनिवार को जारी निर्देशों के अनुसार, हर डेस्टिनेशन वाले हेलीपैड पर उतरने के बाद उन्हें कंट्रोल रूम को एक 'पायलट रिपोर्ट' (PIREP) भी देनी होगी।

 

इन निर्देशों में यह भी कहा गया है कि उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के 'हेड ऑफ ऑपरेशंस' को ऐसी प्रक्रिया बनानी होगी, जिससे हर उड़ान से पहले क्लीयरेंस मिल सके, और सभी पायलट रिपोर्टों को प्राप्त करने, उनकी समीक्षा करने और उनका रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था हो सके। 

नए नियम से कंपनियों के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?  

हेलीकॉप्टर कंपनियों ने मौजूदा नियमों के तहत हर उड़ान में दो पायलट रखने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वे इस नियम को मौजूदा स्थिति में लागू नहीं कर सकती हैं। कंपनियों का कहना है कि उनसे सलाह लिए बिना और इस फैसले से होने वाले खर्च का आकलन किए बिना दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे हेलीकॉप्टर सेवा चलाना आर्थिक रूप से मुश्किल हो जाएगा।

 

कंपनियों ने अपने पत्र में कहा कि हर उड़ान में दो पायलट रखने से उनका खर्च काफी बढ़ जाएगा। इसके लिए ज्यादा पायलट रखने होंगे। उनके रहने, आने-जाने और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं पर भी अतिरिक्त पैसा खर्च करना होगा। कंपनियों के मुताबिक, मौजूदा किराये और सीमित कमाई को देखते हुए वे इस अतिरिक्त खर्च को खुद नहीं उठा सकतीं। इसका पूरा बोझ यात्रियों पर डालना भी संभव नहीं है।

 

हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने कहा कि सुरक्षा के लिए नए नियम बनाना जरूरी है, लेकिन उन्हें लागू करना व्यावहारिक होना चाहिए। नियमों से कंपनियों पर इतना खर्च नहीं बढ़ना चाहिए कि उनके लिए सेवा चलाना ही मुश्किल हो जाए। ऐसे फैसले लेने से पहले संबंधित कंपनियों से बातचीत भी होनी चाहिए।

 

कंपनियों ने पत्र में साफ कहा कि जब तक अधिकारी इस फैसले की समीक्षा नहीं करते और बातचीत से कोई सहमति वाला रास्ता नहीं निकलता, तब तक वे 2 नवंबर से चारधाम की चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद रखेंगी।

आखिरी चरण में श्रद्धालुओं के लिए बढ़ी मुश्किल

नियम के विरोध में हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने सोमवार, 2 नवंबर से चारधाम यात्रा मार्ग पर चार्टर सेवाएं रोक दी हैं। इससे यात्रा के आखिरी चरण में श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है। चारों धामों के कपाट नवंबर के मध्य तक सर्दियों के लिए बंद हो जाएंगे। ऐसे में यात्रा अब अपने अंतिम चरण में है। UCADA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार सुबह बताया कि हेलीकॉप्टर अभी धामों से श्रद्धालुओं को वापस ला रहे हैं, लेकिन देहरादून से किसी भी श्रद्धालु को धामों तक नहीं ले जाया गया है।


और पढ़ें