बिहार के औरंगाबाद में एक सरकारी दफ्तर के क्लर्क ने नौ साल तक एक ही समय में दो अलग-अलग जगहों पर नौकरी की और दोनों जगह से पैसे लिए। यह मामला तब पता चला जब एक पूर्व सांसद ने इसकी शिकायत की। जांच में आरोप सही निकलने पर जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने क्लर्क कृष्ण प्रसाद वर्मा को काम से हटा दिया है और उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
यह मामला तब सामने आया जब औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर शिकायत की। उन्होंने बताया कि सिविल सर्जन ऑफिस में काम करने वाला एक कर्मचारी दो अलग-अलग सरकारी जगहों पर नौकरी कर रहा है और दोनों जगह से पैसे ले रहा है। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाते हुए सिविल सर्जन को मामले की जांच करके कार्रवाई करने को कहा। इसके बाद ऑफिस के लोग सतर्क हो गए और फाइलों की जांच शुरू हो गई।
यह भी पढ़ें: 12 साल के बच्चे को खा गया मगरमच्छ, कई बार पटका, देखते रह गए लोग
जांच में सामने आई सच्चाई
जिलाधिकारी के आदेश पर सिविल सर्जन ने तीन लोगों की एक टीम बनाई। टीम ने वर्मा की फाइलें और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के रिकॉर्ड देखे। जांच में बहुत सी गलतियां मिलीं। कागजों से साफ पता चला कि यह कर्मचारी एक ही समय में दो जगहों से पैसे ले रहा था। इसके बाद जिलाधिकारी ने एक और टीम बनाई जिसमें कई विभागों के अफसर शामिल थे। इस जांच में पता चला कि कृष्ण प्रसाद वर्मा 6 जुलाई 2005 से औरंगाबाद के सिविल सर्जन ऑफिस में क्लर्क के पद पर हैं।
साथ ही, वे 24 नवंबर 2008 से 12 मार्च 2017 तक झारखंड के भारत कोकिंग कोल लिमिटेड में भी जूनियर ओवरमैन के पद पर काम कर रहे थे। उन्होंने करीब 9 साल तक दोनों जगह नौकरी की और दोनों जगह से पैसे उठाए। जांच टीम ने दोनों जगह के कागजों को मिलाकर पक्का किया कि यह सब एक ही आदमी कर रहा था। इसे सरकारी नियमों का बड़ा उल्लंघन माना गया है।
यह भी पढ़ें: बस स्टैंड पर खड़ी थी लड़की, पूर्व प्रेमी ने मार डाला, वीडियो डरा देगा
प्रशासन की कड़ी कार्रवाई
प्रशासन ने इस दौरान वर्मा को दो बार नोटिस भेजकर जवाब मांगा। उनसे पूछा गया कि यह सब कैसे हुआ लेकिन वे अपनी सफाई में कोई पक्का सबूत या सही जवाब नहीं दे सके। उनका जवाब प्रशासन को पसंद नहीं आया। सब सबूत देखने के बाद जिलाधिकारी ने कड़ा फैसला लिया और कृष्ण प्रसाद वर्मा को तुरंत काम से हटा दिया। निलंबन के समय में उनका नया ऑफिस गोह का सरकारी अस्पताल तय किया गया है। इस दौरान उन्हें रहने के लिए थोड़ा पैसा यानी जीवन-यापन भत्ता मिलेगा।
साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो गई है। जिलाधिकारी ने कहा है कि इस मामले की जांच पूरी तरह से साफ-सुथरी और समय पर पूरी की जाए। एक ही व्यक्ति द्वारा दो सरकारी नौकरी करने का मामला सामने आने के बाद सब लोग हैरान हैं। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपने कर्मचारियों के रिकॉर्ड की फिर से जांच करें ताकि ऐसी कोई और गड़बड़ी न मिले।