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मध्य प्रदेश के अस्पतालों में बनेंगे, गर्भ संस्कार कक्ष, क्यों हो रही ऐसी कवायद?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राज्य के सरकारी अस्पतालों के लिए बढ़ी की है। इस घोषणा के अनुसार, प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार कक्ष’ बनाए जाएंगे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, photo credit - sora

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राज्य के सरकारी अस्पतालों से जुड़ी एक अहम घोषणा की है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार कक्ष’ बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में गर्भ संस्कार कक्ष बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सभी मेडिकल कॉलेजों में गर्भ संस्कार से संबंधित पढ़ाई भी कराई जाएगी, ताकि नवजात शिशुओं का जन्म शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो सके।

 

यह घोषणा मुख्यमंत्री ने इंदौर के डेली कॉलेज में आयोजित ‘दिव्य संतान संकल्प’ नामक कार्यक्रम के दौरान की। इस कार्यक्रम में स्वस्थ संतान के जन्म और मातृत्व से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही थी। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री ने गर्भ संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यह घोषणा की।

 

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गर्भ संस्कार पर मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गर्भ संस्कार विषय पर बात करते हुए महाभारत की पौराणिक कथा के पात्र अभिमन्यु का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 'सनातन संस्कृति में गर्भ संस्कार का विशेष महत्व रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से भावी पीढ़ियों को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।'


मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 'अब एलोपैथी के विशेषज्ञ भी गर्भ संस्कार के महत्व को स्वीकार करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी खुद एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और अपने अस्पताल में गर्भ संस्कार की प्रक्रिया अपनाती हैं।' मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी मेडिकल विश्वविद्यालयों में गर्भ संस्कार की पढ़ाई कराई जाएगी।

 

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गर्भ संस्कार कक्ष क्या है?

गर्भ संस्कार कक्ष वह विशेष कक्ष होगा, जहां गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशुओं के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाएगा। इस कक्ष में गर्भवती महिला के विचार, आहार और व्यवहार के माध्यम से शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

गर्भ संस्कार की प्रक्रिया के अंतर्गत गर्भवती मां अपने अजन्मे बच्चे से संवाद करती है, पौष्टिक आहार ग्रहण करती है, सकारात्मक सोच रखती है, योग और ध्यान करती है तथा अच्छी और प्रेरणादायक किताबें विशेषकर महापुरुषों की जीवन कथाएं पढ़ती है। माना जाता है कि इन सभी गतिविधियों का शिशु पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और स्वस्थ संतान के जन्म में मदद मिलती है। आने वाले समय में यह प्रक्रिया डॉक्टरों की देखरेख में गर्भ संस्कार कक्षों में कराई जाएगी।

गर्भ संस्कार कक्ष का महत्व

विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि शिशु का मानसिक और भावनात्मक विकास मां के गर्भ में ही शुरू हो जाता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान मां का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक होता है। जब मां स्वस्थ और सकारात्मक रहती है, तभी शिशु का भी स्वस्थ विकास संभव हो पाता है। इसी कारण गर्भ संस्कार कक्ष को माताओं और शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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