संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति इन दिनों एक नए मोड़ पर खड़ी है। सत्ता की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अब अपनी टीम को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में उनका दिल्ली दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, जहां उन्होंने एनडीए के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश की।
रविवार को राजधानी दिल्ली में बैठकों का लंबा दौर चला। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिसे इस पूरी कवायद का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाली बताई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने एनडीए के प्रमुख नेताओं जीतन राम मांझी, ललन सिंह और नित्यानंद राय से भी मुलाकात की।
यह भी पढ़ें: 'गुनाह की राह चुनी तो अंत तय', आनंद मिश्रा की अपराधियों को खुली चेतावनी
एनडीए के कई नेताओं से मुलाकात
इन बैठकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने विकसित भारत और समृद्ध बिहार के विजन को दोहराया। नित्यानंद राय के साथ हुई चर्चा को उन्होंने खासा सकारात्मक बताया, वहीं ललन सिंह के साथ तालमेल और विकास के मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। जीतन राम मांझी के साथ हुई मुलाकात को उन्होंने शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे भी समीकरण साधने की प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं।
दिल्ली दौरे की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ राजनीतिक सहयोगियों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि केंद्र सरकार के अहम मंत्रियों से भी मुलाकात की। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी बातचीत की। इन मुलाकातों को विकास योजनाओं और केंद्र-राज्य समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप देने की तैयारी
सूत्रों की मानें तो यह पूरा दौरा सिर्फ शिष्टाचार या औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं है। इसका असल मकसद बिहार मंत्रिमंडल के विस्तार को अंतिम रूप देना है। मुख्यमंत्री जल्द ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद नई कैबिनेट की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें: 'गलती हो गई', गुजरात के अस्पताल ने माना टीबी मरीज को चढ़ा गलत खून
नहीं हुआ मंत्रिमंडल का विस्तार
गौरतलब है कि 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है। फिलहाल सरकार का कामकाज सीमित दायरे में चल रहा है, जहां मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्री क्रमशः विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक गति और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए कैबिनेट विस्तार जरूरी हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई कैबिनेट में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ अनुभव और युवा चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। इसके जरिए सरकार आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए मजबूत संदेश देना चाहती है।
अब निगाहें दिल्ली दौरे के नतीजों पर टिकी हैं। क्या सम्राट चौधरी अपनी टीम को जल्द अंतिम रूप दे पाएंगे? क्या नई कैबिनेट बिहार की राजनीति में नया संतुलन बनाएगी? इन सवालों के जवाब जल्द सामने आ सकते हैं। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की सियासत में हलचल तेज है और आने वाले दिन काफी निर्णायक साबित होने वाले हैं।