अक्सर एयरपोर्ट पर सामान खराब मिलने के बाद लोग थोड़ा-बहुत गुस्सा करके या निराश होकर घर चले जाते हैं लेकिन बेंगलुरु के एक शख्स ने एयरलाइन की लापरवाही के खिलाफ लड़ने का फैसला किया। करीब डेढ़ साल चली इस कानूनी जंग के बाद कंज्यूमर फोरम ने एयर इंडिया को सेवा में लापरवाही बरतने का दोषी पाया है और यात्री को मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस आदेश के तहत एयरलाइन को करीब 17 हजार रुपये देने होंगे।
यह मामला 8 सितंबर 2024 का है, जब दिल्ली से बेंगलुरु आ रहे सौरभ रापेरिया का फ्रेजाइल टैग लगा ट्रॉली बैग बुरी तरह टूट गया। जब उन्होंने एयरपोर्ट पर इसकी शिकायत करनी चाही, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया और उन्हें ईमेल करने की सलाह दी। इसी लापरवाही को आधार बनाकर कोर्ट ने एयरलाइन के उन तर्कों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यात्री ने बिना शिकायत किए एयरपोर्ट छोड़ दिया था।
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मामले की मुख्य बातें
सौरभ ने शुरूआत में एयरलाइन से बात करके अपने नुकसान की भरपाई मांगी लेकिन कंपनी ने मामूली मुआवजे की रकम देकर मामले को किनारा करना चाहा। आपको बता दें कि सौरभ ने बैग के नुकसान के लिए 13,425 रुपये या नया बैग मांगा था। इसके बदले एयरलाइन ने पहले सिर्फ 500 रुपये और बाद में 1,000 रुपये देने की बात कही। इसके बाद उन्होंने इसे नाकाफी बताते हुए ठुकरा दिया और कंपनी को नोटिस भेज दिया।
एयरलाइन का तर्क
एयर इंडिया का कहना था कि उनकी पॉलिसी के हिसाब से अगर यात्री बिना शिकायत दर्ज कराए बैग लेकर एयरपोर्ट से बाहर निकल जाता है, तो माना जाता है कि सामान सही स्थिति में मिला था।
पूरे मामले पर कोर्ट ने क्या कहा?
कंज्यूमर कमीशन ने कहा कि जब एयरलाइन खुद मुआवजे की पेशकश कर रही है, तो इसका मतलब है कि उसने अपनी गलती मान ली है। साथ ही, कमीशन ने कहा कि अगर कंपनी के कर्मचारी ही शिकायत दर्ज करने से रोकें, तो कंपनी अपनी इंटरनेशनल पॉलिसी का हवाला देकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
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फोरम का फैसला
17 फरवरी 2026 को सुनाए गए अपने फैसले में कमीशन ने एयर इंडिया को आदेश दिया कि वह यात्री को 7,000 रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में अदा करें। कोर्ट ने साफ किया कि एक बार सामान खराब होने की बात साबित हो जाए, तो यह साबित करना एयरलाइन की जिम्मेदारी है कि उन्होंने लापरवाही नहीं की, जो इस मामले में कंपनी नहीं कर पाई।