दिल्ली के अस्पतालों में दवा और अन्य उपकरणों की सप्लाई में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि लगभग 650 करोड़ रुपये की खरीद में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ और कई नियमों का भी उल्लंघन किया गया। अब दिल्ली सरकार ने पूर्व स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल और बीजेआरएम अस्पताल के पूर्व कार्यालय प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को सस्पेंड कर दिया है। इस केस की जांच दिल्ली का ऐंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) कर रहा है।
मंगलवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग की ओर से जारी अलग-अलग आदेशों में कहा गया कि यह कार्रवाई केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के नियम 10(1) के तहत की गई है और तत्काल प्रभाव से लागू होगी। हालांकि, दिल्ली सरकार ने निलंबन आदेशों में उल्लिखित प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्यवाही के आधार बने विशिष्ट आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया है। पिछले ही महीने डॉ. वत्सला अग्रवाल को उनके पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह पर जग प्रेश चंद्र अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुषमा जैन को DGHS बनाया गया था। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के इस फैसले के बाद दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई थी।
क्या है दवाओं की खरीद में घोटाले वाला केस?
सबसे बड़ा और पहला आरोप है कि दिल्ली सरकार की सेंट्रल प्रोक्यूटरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए दवाओं और मेडिकल से जुड़ी अन्य चीजों की जो खरीद की गई उसमें बड़े स्तर पर घोटाला हुआ। यह CPA स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) के अंतर्गत काम करता है इसलिए इस पद पर तैनात रहीं डॉ. वत्सला अग्रवाल को पहले उनके पद से हटाया गया और फिर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।
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आरोप है कि अपनी पसंद के सप्लायर्स को टेंडर देने के लिए नियमों का उल्लंघन किया गया। इसी क्रम में दिल्ली की विजिलेंस टीम ने शकरपुर स्थित CPA दफ्तर में छापा भी मारा था। विजिलेंस विभाग को कई अन्य सप्लायरों की ओर से शिकायत मिली थी। कई वेंडरों ने अपनी शिकायत में कहा था कि CPA अधिकारी डॉ. विजय कुमार रंगा ने पिछले 6 महीने में बिना डिमांड के ही 350 करोड़ की दवाईयां और उपकरण खरीद लिए। आरोप है कि इतनी चीजों की जरूरत ही नहीं थी लेकिन यह खरीद सिर्फ अपनी पसंद के वेंडरों को फायदा पहुंचाने के लिए की गई।
जब अस्पतालों ने गैरजरूरी स्टॉक लेने से इनकार कर दिया तो पांच बड़े अस्पतालों में स्पेशल स्टोरेज के लिए जगह बनाई गई। इनमें इंदिरा गांधी और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी शामिल हैं। अब कहा जा रहा है कि यह मामला 650 करोड़ तक का हो सकता है। इसी केस में ACB ने एफआईआर दर्ज की है और इसकी जांच कर रही है।
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फाइलें गायब होने पर बढ़ा शक
आरोप है कि जब छापेमारी की गई तो कई जरूरी फाइलें गायब मिलीं। अब आशंका जताई जा रही है कि इन फाइलों और कई जरूरी दस्तावेजों को जानबूझकर गायब कर दिया गया। जो दस्तावेज गायब हुए हैं उनमें टेंडर से जुड़ी जरूरी फाइलें भी शामिल हैं। बता दें कि इसी केस के चलते अभी तक लगभग 40 डॉक्टरों का ट्रांसफर किया जा चुका है। सरकार की कोशिश है कि कोई भी ऐसा अधिकारी ऐसी जगह पर ना रहे जहां से वह जांच को प्रभावित न कर सके।
क्या है CPA और कैसे करती है काम?
दिल्ली में एक सेंट्रल प्रोक्यूरमेंट एजेंसी (CPA) है। साल 1994 में बनी यह एजेंसी दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों, क्लीनिक और मेडिकल संस्थानों के लिए दवाओं और मेडिकल उपकरण खरीदती है। एक एसेंशियल ड्रग लिस्ट (EDL) कमेटी होती है जो समय-समय पर दवाओं की लिस्ट बनाती है। एक स्पेशल परचेज कमेटी (SPC) होती है तो चीजों की खरीद प्रक्रिया पर नजर रखती है। इसी तरह कई अन्य कमेटियां हैं जो अलग-अलग काम करती हैं।