दिल्ली सरकार राशन वितरण व्यवस्था में बड़ा सुधार करने की तैयारी कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि अब राशन कार्ड जिले की जनसंख्या के आधार पर कोटा तय करके जारी किए जाएंगे।
दिल्ली में अभी राशन ई-पॉस मशीनों के जरिए बायोमेट्रिक (उंगलियों के निशान या चेहरा) जांच के बाद दिया जाता है। नए नियमों के तहत दिल्ली सरकार हर जिले की आबादी के हिसाब से राशन कार्ड का कोटा तय करेगी। अभी के लिए पुरानी जनगणना को आधार बनाया जाएगा।
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कार्ड धारकों की जांच होगी
सरकार राशन कार्ड धारकों की जांच भी करेगी ताकि गलत या अयोग्य लोगों को हटाया जा सके और असली जरूरतमंदों को फायदा मिले।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में नई नीति 'दिल्ली फूड सिक्योरिटी रूल्स, 2025' को मंजूरी दी गई है। इसमें परिवार की आय प्रमाण पत्र को जरूरी बनाया गया है ताकि पात्रता स्पष्ट हो सके। बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि शिकायतों के निपटारे के लिए सर्कल, जिला और राज्य स्तर पर बहु-स्तरीय व्यवस्था बनाई जाए।
काफी डुप्लिकेट लाभार्थी
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, सरकार ने करीब 23,394 डुप्लिकेट लाभार्थियों की पहचान की है और लगभग 95,682 'साइलेंट लाभार्थी' हैं। ये वे लोग हैं जो सिस्टम में लंबे समय से हैं लेकिन राशन नहीं लेते।
अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित दिल्ली फूड सिक्योरिटी रूल्स, 2025 एक ऐसा ढांचा बनाएगा जो निष्पक्ष पहचान पर ध्यान देगा, जरूरत को प्राथमिकता देगा और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।
बनेगी कमेटी
नई नीति का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा जिला स्तर पर कमेटियां बनाना है। ये कमेटियां सबसे गरीबों को प्राथमिकता देंगी। ये कमेटियां डीएम या एडीएम की अध्यक्षता में होंगी और इनमें विधायक, एसडीएम और असिस्टेंट कमिश्नर शामिल होंगे। ये सबसे जरूरतमंदों को प्राथमिकता देंगी और 20 प्रतिशत वेटिंग लिस्ट भी रखेंगी।
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहले ही घोषणा की थी कि राशन कार्ड के लिए परिवार की सालाना आय सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.2 लाख रुपये कर दी जाएगी। इससे ज्यादा परिवारों को सब्सिडी वाला राशन मिल सकेगा और गरीबों को बेहतर मदद मिलेगी।