दिल्ली के एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने मानवीय संवेदना और न्याय की मिसाल पेश करते हुए एक सड़क हादसे के पीड़ित को 1.52 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला भरत घई नामक व्यक्ति के पक्ष में आया है। जो साल 2022 में हुई एक दुर्घटना के बाद से 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो गए थे।
अदालत ने पाया कि 11 फरवरी 2022 को एक तेज रफ्तार कार ने भरत को ऐसी टक्कर मारी कि उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। इस हादसे ने भरत को 'हाइपॉक्सिक ब्रेन इंजरी' का शिकार बना दिया, जिसके चलते वह पिछले दो सालों से बिस्तर पर हैं और कोमा जैसी स्थिति में जीवन बिता रहे हैं। ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी सुदीप राज सैनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बीमा कंपनी को मुआवजे की यह राशि तुरंत भुगतान करने का निर्देश दिया है।
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सुनवाई के दौरान कार चालक और मालिक के कानूनी प्रतिनिधियों ने खुद को बचाने की पूरी कोशिश की। उनकी ओर से दलील दी गई कि जिस वाहन का जिक्र किया जा रहा है वह इस हादसे में शामिल ही नहीं था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इस बचाव को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पुलिस की FIR, चार्जशीट, मेडिकल रिपोर्ट और मौके पर मौजूद चश्मदीद गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि यह दुर्घटना केवल और केवल ड्राइवर की लापरवाही और तेज गति के कारण हुई थी।
कोर्ट ने जताई चिंता
अदालत ने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि हादसे के बाद से भरत घई पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो गए हैं। कोर्ट ने आदेश में कहा, 'पीड़ित अपनी दैनिक जरूरतों और चिकित्सा देखभाल के लिए पूरी तरह पराया मोहताज है। उसे अपने पूरे जीवनकाल के लिए कम से कम एक फुल टाइम अटेंडेंट की आवश्यकता होगी।' इसी भविष्य की देखभाल और दवाओं के खर्च को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की यह बड़ी राशि निर्धारित की गई है।
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अलग-अलग हिस्सों में बंटा मुआवजे की राशि
ट्रिब्यूनल ने मुआवजे की राशि को लॉजिकल आधार पर अलग-अलग हिस्सों में बांटा है। इसमें 52 लाख रुपये से अधिक की राशि भविष्य की कमाई के नुकसान के रूप में दी गई है क्योंकि अब पीड़ित कभी काम करने की स्थिति में नहीं लौट सकेगा। इसके अतिरिक्त, अस्पताल के खर्च और अब तक हुए इलाज की भरपाई के लिए 54 लाख रुपये से ज्यादा की राशि तय की गई है। कोर्ट ने साफ किया कि चूंकि वाहन का बीमा था इसलिए यह पूरी जवाबदेही बीमा कंपनी की बनती है।