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DU के एक दर्जन कॉलेजों में RSS के कार्यक्रम से क्यों बिफरे छात्र? टीचर्स भी बोले

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक दर्जन कॉलेजों में RSS अपने 100 साल पूरे होने पर'युवा कुंभ' नाम का इवेंट करवा रहा है। इस इवेंट पर विवाद हो गया है।

University of Delhi

दिल्ली यूनिवर्सिटी। Photo Credit- Social Media

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) एक दर्जन से ज्यादा कॉलेजों में 'युवा कुंभ' नाम का एक इवेंट करवा रहा है। इस इवेंट में आरएसएस के पदाधिकारियों को संघ के 100 साल पूरे होने पर अपनी बात रखने के लिए बुलाया गया है। इसी कड़ी में जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज ने शुक्रवार को ऐसा ही एक कार्यक्रम करवाया। इसमें आरएसएस के प्रचारक इंद्रेश कुमार ने प्रिंसिपल नरेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपनी बात रखी।

 

यूनिवर्सिटी में इस तरह के कार्यक्रम करवाने पर छात्रों और शिक्षकों के ग्रुप ने दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन की आलोचना की है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपने कॉलेजों को आएसएस के बैनर तले इन इवेंट्स को करवाने की इजाजत दी है।

 

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छात्रों ने क्या कहा?

छात्रों का कहना है कि एक शैक्षणिक संस्थान को अपने छात्रों को सीखाने पर ध्यान देना चाहिए, ना कि किसी विचारधारा का बढ़ावा देने के लिए। जब कॉलेज प्रशासन छात्रों की सोसाइटी को ऑडिटोरियम देने से मना करता है लेकिन आरएसएस को कार्यक्रम करने के लिए देता है। यह साफ तौर पर पक्षपाती रवैया है।

'विचारधारा को एंट्री नहीं देनी चाहिए'

एक छात्र के मुताबिक, 'कॉलेज को किसी भी विचारधारा को यूनिवर्सिटी में एंट्री नहीं देनी चाहिए। हमारा कॉलेज दावा करता है कि उसके पास साफ वॉशरूम जैसी मूलभूत सुविधा के लिए कोई फंड नहीं है लेकिन ऐसे कार्यक्रम के लिए पैसा मौजूद है। यह गलत प्राथमिकताओं दिखाता है। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं। प्रशासन को सभी के साथ एक जैसा बर्ताव करना चाहिए और सबसे पहले छात्रों की मूलभूत जरूरतों पर ध्यान देना करना चाहिए।'

 

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टीचरों ने विवाद पर क्या कहा?

वहीं, इंडियन नेशनल टीचर्स कांग्रेस (INTEC) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज कैंपस का इस्तेमाल आरएसएस के कार्यक्रम करवाने के लिए निंदा की है। उनका कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस तरह के ट्रेंड बढ़ रहा है। एक बयान में INTEC और यूनिवर्सिटी एकेडमिक काउंसिल की सदस्य प्रोफेसर नीलम और लतिका गुप्ता ने कहा कि सार्वजनिक फंडेड विश्वविद्यालय में यह व्यवस्थित घुसपैठ उन संस्थाओं के अंदर विचारधारा के दबदबे को सामान्य बनाने की एक खतरनाक कोशिश है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों का मकसद सेक्युलर, समावेशी और अकादमिक ऑटोनॉमस बॉडी बनाए रखना है।

 

बयान में कहा गया है कि इस कार्यक्रम को न तो दिल्ली विश्वविद्यालय से किसी तरह की आधिकारिक मंजूरी मिली है और न ही शिक्षा मंत्रालय ने इन्हें मंजूरी दी है। मगर, इसके बावजूद कॉलेज के आधारभूत संरचना, प्रशासनिक तंत्र और छात्रों के मंच का इस्तेमाल इन्हें आसान बनाने के लिए किया जा रहा है। कुछ कॉलेजों में आरएसएस के बैनर शैक्षणिक संस्थानों के खुले भगवाकरण की तरफ एक खतरनाक बदलाव दिखाते हैं।

 

CPI(M) के छात्र संगठन SFI ने जाकिर हुसैन में कार्यक्रम वाली जगह के पास प्रदर्शन किया। SFI ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों पर बल प्रयोग किया और उनके साथ मारपीट की।

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