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बिहार: राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की MLC सदस्यता खत्म करने की मांग क्यों उठी?

राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के बीजेपी में शामिल होने को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। अब इन दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग उठ रही है। 

Rahul Raj & Bansidhar Brajwasi

राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी, Photo Credit- X @IANS

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संजय सिंह, पटना। बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों से निर्दलीय जीतकर आए राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के बीजेपी में शामिल होने को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग उठने लगी है। इसी कड़ी में आज जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार विधान परिषद के सभापति प्रो. राम बच्चन राय से मुलाकात की। साथ ही दोनों सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। 


जन सुराज का आरोप है कि दोनों निर्दलीय सदस्यों ने चुनाव जीतने के बाद बीजेपी का दामन थाम लिया जो दल-बदल कानून के दायरे में आता है। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों के खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

 

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दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग

निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के बीजेपी में शामिल होने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। जन सुराज के नेता और पूर्व MLC रामबली चंद्रवंशी ने दोनों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। रामबली चंद्रवंशी का कहना है कि निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करना दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई का विषय है। 

 

 

उन्होंने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई निर्दलीय सदस्य यदि चुनाव जीतने के 6 महीने के अंदर किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसकी सदस्यता स्वत: समाप्त हो जाती है।

जन सुराज ने सभापति को सौंपा ज्ञापन

जन सुराज का एक प्रतिनिधिमंडल विधान परिषद के सभापति प्रो. राम बच्चन राय से 2 नवंबर यानी सोमवार को मिला। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व MLC, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ और अन्य नेता शामिल थे प्रतिनिधिमंडल ने सभापति को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि दोनों निर्दलीय MLC की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए। 

 

जन सुराज ने अपने ज्ञापन में कहा कि दोनों ने मतदाताओं को धोखा दिया है। टीचर और ग्रेजुएट मतदाताओं ने उन्हें निर्दलीय के तौर पर चुना था लेकिन उन्होंने जीतते ही भाजपा का दामन थाम लिया।

'मतदाताओं के साथ धोखा'

रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि यह मतदाताओं के साथ धोखा है। निर्दलीय के नाम पर वोट लिया और फिर सत्ता दल में चले गए। यह जनादेश की चोरी है। सभापति को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जन सुराज इस लड़ाई को आखिरी तक लड़ेगा। अगर सभापति स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो हम चुनाव आयोग और हाई कोर्ट जाएंगे। संविधान से बड़ा कोई नहीं है। 

 

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बता दें कि 27 अक्टूबर को विधान परिषद की 8 सीटों के परिणाम आए थे। इसमें बीजेपी को 2, राजद को 2, जदयू को 1, जन सुराज को 1 और 2 सीटों पर निर्दलीय जीते थे। परिणाम आने के 72 घंटे के भीतर ही दोनों निर्दलीय नेताओं ने शनिवार को पार्टी ऑफिस में सदस्यता ले ली थी। राहुल राज ने तिरहुत स्नातक और बंशीधर ब्रजवासी ने सारण शिक्षक सीट से जीत हासिल की थी। दोनों की जीत के बाद से ही सियासी गलियारों में चर्चा थी कि वे किस दल में जाएंगे। अब जन सुराज के ज्ञापन के बाद इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। देखना होगा कि सभापति इस पर क्या फैसला लेते हैं?


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